– यूपी पर 4 विकेट से जीत के बावजूद विदर्भ का क्वार्टर फाइनल का टिकट कट गया
– पूल ए से आन्ध्र प्रदेश और झारखंड की टीम नॉकआउट दौर के लिए क्वालिफाई कर गईं
हेड कोच अरविन्द कपूर की यूपी रणजी टीम सीजन के अपने अंतिम दोनों मुकाबले हारने के साथ रणजी ट्रॉफी टूर्नामेंट में विदा हो गई। उसे नागपुर के जमथा स्टेडियम में एलीट ग्रुप ए के आखिरी लीग मुकाबले में विदर्भ के हाथों 4 विकेट से शिकस्त खानी पड़ी। पिछले मैच में उसे लखनऊ के इकाना स्टेडियम में अपने ही विकेट पर झारखंड के हाथों पारी से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। नागपुर पहुंचने से पहली ही यूपी ट्रॉफी की दौड़ से बाहर हो चुकी थी और अब उसके मौजूदा रणजी सत्र का अंत एक और हार के साथ हुआ। यूपी फिर अगले सत्र में रणजी ट्रॉफी जीतने का प्रयास करने उतरेगी। ऐसा 25 साल से चल रहा है। यूपीसीए की चयनसमिति की आड़ में कथित रूप से पर्दे के पीछे से फैसले लेने वालों की चलती रही तो आगे भी ऐसा ही होता रहेगा।
यूपी अपने पूल में 5वें स्थान पर रही
लो स्कोरिंग वाले इस मैच में विदर्भ को भी जीत से कोई फायदा नहीं हुआ, बल्कि उसका नेट रन रेट और बिगड़ गया। नेट रन रेट में पिछड़ने के कारण मेजबान टीम क्वार्टर फाइनल खेलने का टिकट नहीं हासिल कर सकी। यूपी की टीम दो हार और एक जीत के बाद प्वाइंट टेबल में 17 अंकों के साथ अपने ग्रुप में बड़ौदा के बाद पांचवें नंबर पर रही। दूसरी ओर कोच ज्ञानेन्द्र पांडेय की यूपी टीम कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी में उत्तराखंड के खिलाफ पारी और 15 रनों की जीत दर्ज कर बोनस अंक के साथ ग्रुप डी में टॉप पर है। उसके 5 मैचों से 40 अंक हैं।
नेट रनरेट में पिछड़कर विदर्भ की टीम बाहर हो गई
यूपी पर 4 विकेट से जीत और संयुक्त रूप से 31 अंक लेकर आन्ध्र प्रदेश और झारखंड के साथ शीर्ष पर रहने के बावजूद विदर्भ की टीम का क्वार्टर फाइनल का टिकट कट गया, जबकि पूल ए से आन्ध्र प्रदेश और झारखंड की टीम नॉकआउट दौर के लिए क्वालिफाई कर गईं। दरअसल तीनों ही टीमों के 7 मैचों के बाद 31-31 अंक थे। लेकिन नेट रनरेट में बेहतर होने की वजह से आन्ध्र प्रदेश (1.628) शीर्ष पर रही, जबकि झारखंड (1.545) को भी विदर्भ (1.113) से बेहतर बेहतर नेट रनरेट होने की वजह से दूसरी टीम के रूप में क्वार्टर फाइनल का टिकट मिल गया।
अमन मोकाड़े और दानिश मालेवर ने यूपी को मुकाबले से किया बाहर
मैच के चौथे व अंतिम दिन विदर्भ को जीत के लिए 110 रनों की और जरूरत थी, जबकि उसके 6 विकेट हाथ में थे। अमन मोकाड़े ने 83 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली। इसके अलावा उन्होंने पहली पारी में शानदार 80 रन बनाने वाले दानिश मालेवर (54) के साथ पांचवें विकेट के लिए 82 रनों की साझेदारी निभाकर यूपी को मुकाबले से एकदम बाहर कर दिया। मोकाड़े ने अपनी अर्द्धशतकीय पारी के दौरान 150 गेंदें खेलने के साथ 10 शानदार चौके जड़े, जबकि दानिश मालेवर ने 89 गेंदों का सामना करते हुए एक छक्का और 5 चौके जड़े। कप्तान हर्ष दुबे 17 और नचिकेत भुते 6 रन बनाकर नाबाद लौटे। यूपी के लिए शिवम शर्मा ने 4, जबकि कार्तिक त्यागी और ध्रुव जुरेल ने 1-1 विकेट लिया।
यूपी कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी में अपने पूल में टॉप पर
यूपी की टीम रणजी मुकाबले में तो हार गई लेकिन उसकी अंडर 23 कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी खेल रही टीम ने कौशिकी क्रिकेट ग्राउंड, जिम कॉर्बेट (रामनगर) में रविवार को समाप्त हुए मुकाबले में मीडियम पेसर विजय कुमार की घातक गेंदबाजी से उत्तराखंड को एक पारी व 15 रन से हराकर पूरे अंक हासिल कर लिए। विजय कुमार ने उत्तराखंड की दूसरी पारी को तहस-नहस करते हुए 47 रन देकर 6 विकेट लिए। इसके अलावा मीडियम पेसर प्रशांत यादव ने 32 रन देकर 3 बल्लेबाजों को अपना शिकार बनाया।
पहली पारी में अक्शु बाजवा तो दूसरी में विजय कुमार के 6 विकेट
इस मुकाबले में उत्तराखंड की टीम अक्शु बाजवा (6 विकेट) की शानदार गेंदबाजी के सामने पहली पारी में सिर्फ 170 रन पर सिमट गई थी। यूपी ने अपनी पहली पारी में 318 रन बनाए और 148 रन की लीड प्राप्त की। उत्तराखंड के बल्लेबाज दूसरी पारी में विजय कुमार की कातिलाना गेंदबाजी के सामने घुटने टेकते नजर आए और पूरी टीम 133 रन पर ध्वस्त हो गई। उत्तराखंड के लिए आदित्य नैथानी ने 43 और ईशाग्रा जागोरी ने 43 रन बनाकर पारी की हार टालने के लिए कुछ देर जरूर यूपी के गेंदबाजों का सामना किया। लेकिन वे सफल नहीं हो सके।
अनुभवी ज्ञानेन्द्र पांडेय पर अरविन्द कपूर को तरजीह देने का परिणाम
बता दें कि कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी के लिए यूपी की टीम के कोच ज्ञानेन्द्र पांडेय 1989 में डेब्यू करने के बाद 117 प्रथम श्रेणी और 82 लिस्ट ए मैच खेल चुके हैं, जबकि अरविन्द कपूर ने सिर्फ 15 प्रथम श्रेणी और 19 लिस्ट ए मैच ही खेले हैं, जिसमें भी उनका कोई खास प्रदर्शन नहीं रहा है। इसके बावजूद यूपीसीए ने उनकी विकल्प होने के बावजूद यूपी की सीनियर टीम से नाम मात्र के मैच खेले अरविन्द कपूर को यूपी की सीनियर टीम का हेड कोच बनाया, जिसका रिजल्ट यूपी के दयनीय प्रदर्शन के रूप में आज सबके सामने है।
एक असफल पूर्व क्रिकेटर पर यूपीसीए क्यों है मेहरबान
1997-98 में अपनी कप्तानी में यूपी टीम को फाइनल में पहुंचाने की उपलब्धि भी ज्ञानेन्द्र पांडेय के नाम है, जबकि 2006 से 2010 तक उनके कोचिंग कार्यकाल में पीयूष चावला, सुरेश रैना और आरपी सिंह जैसे खिलाड़ियों ने यूपी टीम को मजबूती दी। ज्ञानेन्द्र पाकिस्तान के खिलाफ खेलने वाली भारतीय टीम के भी सदस्य रह चुके हैं। लेकिन उनकी उपलब्धियों को दरकिनार करके यपीसीए ने एक असफल पूर्व क्रिकेटर को सीनियर कोच की जिम्मेदारी सौंप दी।










