किसी को अपनी नौकरी का पहला दिन याद है? हम सब या तो अपने घर से राजा बेटा बनकर जाते हैं या फिर किसी ढंग के होटल में रुकते हैं, जो सबसे बेहतर कपड़े होंगे हमारे पास वो पहनते हैं, जहां तक संभव हो खूबसूरत दिखने की कोशिश करते हैं।
अब बोलूं की कल नौकरी का पहला दिन है और आज की रात गुजरेगी एक पार्क के बेंच पर जहां मच्छरों ने जीना दुश्वार कर दिया, कपड़े मुहल्ले वालों ने मिलकर दिए, जूते उस बन्दे ने दिए जिसे नौकरी से निकाल कर आपको उसकी जगह भर्ती किया गया है। क्या हालत होगी।
जिंदगी हालत से लड़ने की कहानी है, हर किसी ने अपने जीवन में संघर्ष किया है और सच कहूं तो वो जिंदगी, सच्ची जिंदगी नहीं जिसमें संघर्ष नहीं, बुद्धि सागर कृष्णप्पा कुंदरम उर्फ़ बुद्धि कुंदरन, क्रिकेट की दुनिया के इतिहास के कुछ सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर बल्लेबाजों में से एक थे। महज 18 टेस्ट खेलने वाले इस खिलाड़ी को आज भी अपने मेहनत, प्रतिभा और जुझारूपन के लिए याद किया जाता है।
भारत के लिए एक लंबे समय तक किसी भी विकेटकीपर का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजी प्रदर्शन कुंदरन के नाम था, 192 बहुमूल्य रन। इसके अलावा जो चीज लगातार महान बनाती थी वो थी खुद की गरीबी से लड़ना, जैसे महज 20 साल की उम्र का पदार्पण का वो किस्सा जब घास के बिस्तर पर रात को सोते हुए अगले 5 दिन 150 ओवर विकेटकीपिंग करना या दुनिया भर के महान तेज गेंदबाजों को बिना डरे छाती पर गेंदे खाने की हिम्मत रखने वाला बल्लेबाज का अपने ही देश के क्रिकेट बोर्ड की पक्षपाती रवैए के बावजूद मिले हर मौके पर खुद को साबित करना।
फारुख इंजीनियर और नरेन तम्हाने से ना जाने कितनी बार अच्छा करने के बावजूद भी टीम से निकाल दिया जाता रहा और हर बार अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को मजबूर कर देना कि मुझे टीम में लो, विकेटकीपर के तौर पर नहीं तो विशेषज्ञ बल्लेबाज के तौर पर और वो भी ना हुआ तो भारत के स्पिनरों के लिए गेंद पुरानी करने वाले मध्यम गति के गेंदबाज के तौर पर, मगर मुझे खेलना है।
खैर जिन्होंने क्रिकेट देखा है आज भी उनकी कुछ महान पारियों और कैचों का जिक्र करते हैं, बाद में वो अपनी स्कॉटिश पत्नी के साथ जाकर इंग्लैंड बस गए और वहां की काउंटी ड्रंपेलियर के लिए 56 साल की उम्र तक काउंटी क्रिकेट खेलते रहे।
हालांकि आज उनके बनाए दोनों रिकॉर्ड (विकेटकीपर द्वारा सर्वश्रेष्ठ स्कोर और एक पारी में सबसे ज्यादा 33 चौके) टूट गए हैं, मगर इस गैर पारंपरिक खिलाड़ी का स्वैग आज भी लोगों को याद है जिन्होंने उन्हें खेलते हुए देखा। जन्मदिवस पर दिवंगत सुपरस्टार बुद्धि कुंदरन को नमन है।
(विनित श्रीवास्तव की फेसबुक वॉल से)