हिंदी सिनेमा के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। 89 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया, और उनके साथ ही हिंदी फिल्म उद्योग के एक महत्वपूर्ण युग का भी अंत हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे और कुछ दिन पहले ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सांस लेने में दिक्कत बढ़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। बाद में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन घर पर भी वे लगातार डॉक्टरों की निगरानी में थे। पर्दे पर उनके एक्शन को खूब पसंद किया जाता है। धर्मेंद्र लगातार फिल्मों से जुड़े हुए थे। अब उनकी आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ अगले महीने सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
धर्मेंद्र को कैसे मिला ही-मैन का टाइटल
अगले कई सालों में धर्मेंद्र ने कई हिट और ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। ‘सीता और गीता’, ‘शोले’ और ‘यादों की बारात’ जैसी फिल्मों ने न सिर्फ उनकी वर्सेटिलिटी दिखाई, बल्कि अपने समय के सबसे भरोसेमंद एक्टर्स में से एक के तौर पर उन्हें पहचान दिलाई। 1970 के दशक में अपना स्टारडम बनाए रखने के बाद धर्मेंद्र ने 1980 के दशक में आसानी से एक्शन जॉनर में कदम रखा। उनकी एक्टिंग ने उन्हें इंडिया के ही-मैन का आइकॉनिक टाइटल दिलाया।
जब कुछ दिन पहले उड़ीं धर्मेंद्र की मौत की अफवाहें
इस महीने की शुरुआत में धर्मेंद्र को हेल्थ प्रॉब्लम होने के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जिससे उनके निधन की ऑनलाइन अफवाहें फैल गईं। हालांकि, उनके परिवार ने इन खबरों को खारिज कर दिया और पुराने एक्टर को घर ले आए, जहां उनकी रिकवरी जारी रही। दुख की बात है कि परिवार की उम्मीदों और लाखों फैंस की दुआओं के बावजूद धर्मेंद्र का सोमवार सुबह जुहू में उनके घर पर निधन हो गया।
पवन हंस श्मशान घाट पर हुआ धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार
बाद में पवन हंस श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। धर्मेंद्र के परिवार में उनकी दो पत्नियां, प्रकाश कौर और हेमा मालिनी हैं। उनके छह बच्चे, सनी देओल, बॉबी देओल, ईशा देओल, अहाना देओल, विजेता देओल और अजीता देओल हैं। उनके जाने से फिल्म जगत, फैंस और चाहने वालों में गहरा दुख है।
पीएम मोदी ने कहा- ‘एक युग का अंत’
पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘धर्मेंद्र जी का निधन भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत है। वे एक प्रतिष्ठित फिल्मी हस्ती, एक अद्भुत अभिनेता थे जिन्होंने अपनी हर भूमिका में आकर्षण और गहराई भर दी। जिस तरह से उन्होंने विविध भूमिकाएं निभाईं, उसने अनगिनत लोगों के दिलों को छुआ। धर्मेंद्र जी अपनी सादगी, विनम्रता और गर्मजोशी के लिए भी समान रूप से प्रशंसित थे। इस दुखद घड़ी में, मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, मित्रों और असंख्य प्रशंसकों के साथ हैं। ॐ शांति।’
धर्मेंद्र हिंदी अक्सर अपनी मां को याद करते थे
धर्मेंद्र हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अक्सर अपनी मां की याद और उनसे जुड़े बचपन के किस्से साझा करते थे। धर्मेंद्र ने खुलासा किया था कि उनकी मां चाहती थीं कि बेटा महीने का खर्च समझे, लेकिन वे अक्सर इस बात को नजरअंदाज कर देते थे। उनकी मां सतवंत कौर घर की जिम्मेदारी खुद उठाती थीं—पिता हेडमास्टर थे और मां हाउस वाइफ। धर्मेंद्र बताते थे, जब वे छोटे थे, मां उन्हें समझाती थीं कि खर्च कैसे चलता है और क्यों जरूरी है घर के खर्च-पैसे जानना।
मां की दरियादिली के भी किस्से बताते
सबसे दिलचस्प किस्सा धर्मेंद्र ने अपने कपड़ों को लेकर बताया। उनकी मां अक्सर उनके नए कपड़े चोरी-छुपे निकालकर गांव के जरूरतमंदों को बांट आती थीं। धर्मेंद्र को जब कोई कपड़ा नहीं मिलता था और वे घर में पूछते तो मां कहती थीं, “इतने कपड़ों का क्या करेगा?” सनी द्योल भी मस्ती में कहते, “बीजी ले गई!” कई बार जब धर्मेंद्र गांव जाते, वहां कोई शख्स उनके कोट या कपड़ों को पहन रखा होता और बड़ा प्यार जताता, जिससे धर्मेंद्र को अपनी मां की दरियादिली समझ आती थी।
दूसरे की मदद करना ही असली इंसानियत
मां की दुआएं, उनका स्नेह, और जरूरतमंदों के लिए उनकी संवेदना धर्मेंद्र के जीवन में हमेशा बनी रही। वे कहते थे कि मां कभी चाहती थी कि वह जरूरतमंदों की मदद करें, भले ही वह बेटा इस बात को टालता रहा। उनकी मां ने बच्चों को सिखाया कि जिंदगी में चीजों का मोह छोड़ना और दूसरे की मदद करना ही असली इंसानियत है। धर्मेंद्र का मानना था कि मां की अच्छाइयां और उनके दिए संस्कार उनके व्यक्तित्व में भी झलकते हैं। धर्मेंद्र अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मां के खर्च, कपड़े और बचपन की छोटी-छोटी बातों को याद करते हुए फैंस को प्रेरित करते थे—मां का प्यार सबसे बड़ा है और उसका सम्मान हमेशा करना चाहिए। वे कहते थे कि मां हमेशा परिवार और उनके पास रहीं। जीवन के हर सुख-दुख में मां के आशीर्वाद ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
शहीद फिल्म देखर दिलीप कुमार के फैन हो गए
धर्मेंद्र को उनके एक रिश्तेदार ने जब शहीद फिल्म दिखाई तो वो दिलीप साहब के फैन हो गए। उन्हें अपना बड़ा भाई मानने लगे। दिलीप साहब को शहीद में देखकर धरम जी ने भी ठान लिया कि वो भी एक दिन एक्टर बनेंगे। साल 1952 में धर्मेंद्र एक्टर बनने का ख्वाब आंखों में लिए मुंबई आए। उनका सपना था कि किसी भी तरह उन्हें अपने बड़े भाई दिलीप कुमार से मिलना है। मुंबई आते ही धरम जी ने तय किया कि वो सबसे पहले दिलीप कुमार से मिलेंगे। उन्होंने दिलीप कुमार के घर का पता निकाला। और वो बांद्रा के पाली हिल इलाके में मौजूद उनके बंगले पर पहुंच गए।
धर्मेंद्र बेखौफ दिलीप कुमार के बंगले में घुस गए
धर्मेंद्र बेखौफ दिलीप कुमार के बंगले में घुस गए। ना किसी ने उन्हें देखा और ना ही किसी ने उन्हें टोका। वो सीढ़ियों से ऊपर चढ़ें। वहां कई कमरे थे। उन्होंने एक कमरे का दरवाजा खोला। इत्तेफाक से वो दिलीप कुमार का बेडरूम था। धरम ने देखा कि एक पतला सा नौजवान कमरे में पड़े एक सोफे पर सो रहा है। लेकिन जैसे ही दरवाजा खुलने की आवाज़ हुई वो नौजवान जाग गया। वो नौजवान दिलीप कुमार ही थे। दिलीप साहब को यूं सामने देखकर धरम को कुछ पल के लिए अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। मानो कोई सपना देख रहे हों। कुछ सेकेंड्स तक वो दिलीप कुमार को घूरते रहे।
एक अंजान नौजवान को कमरे में देख घबरा गए दिलीप कुमार
एक अंजान नौजवान का यूं खुद को घूरना, वो भी अपने घर में, दिलीप साहब को बहुत अजीब लगा। वो घबरा गए और उन्होंने अपने नौकरों को आवाज़ लगाना शुरू कर दिया। दिलीप साहब को ऐसा करते देख धर्मेंद्र भी घबराकर बाहर की तरफ भागे। और उनके बंगले से काफी दूर आकर ही उन्होंने पीछे मुड़कर देखा। उस दिन धरम जी को अहसास हुआ कि ये उनका गांव नहीं है जहां कोई भी किसी के घर किसी भी समय बेखौफ आ-जा सकता है। शहर में किसी के घर में ऐसे ही नहीं घुसा जा सकता।
जब मेकअप की जिम्मेदारी दिलीप कुमार की बहन को मिली
कुछ दिनों बाद जब धर्मेंद्र जी को फिल्म इंडस्ट्री में कोई काम नहीं मिला तो वो वापस अपने गांव लौट गए। मगर पांच साल बाद वो फिर से मुंबई लौटे। इस वक्त तक धरम जी की शादी हो चुकी थी। और उनका बेटा सनी भी जन्म ले चुका था। इस दफा धर्मेंद्र फिल्मफेयर के नए टैलेंट हंट के लिए मुंबई आए थे। फिल्मफेयर वालों ने उस प्रतियोगिता के सभी भागीदारों को एक फाइव स्टार होटल में ठहराया था। और इत्तेफाक से प्रतियोगियों के मेकअप की ज़िम्मेदारी दिलीप कुमार की बहन फरीदा को मिली थी।
इस बार धरम जी से दिलीप कुमार बड़े प्यार से मिले
धरम जी को जब पता चला कि ये दिलीप कुमार की बहन हैं तो उन्होने फरीदा जी से रिक्वेस्ट की कि वो एक दफा दिलीप साहब से मिलना चाहते हैं। क्योंकि वो बचपन से उन्हें अपना बड़ा भाई मानते हैं। अगले ही दिन फरीदा जी ने दिलीप साहब से धर्मेंद्र जी की मुलाकात फिक्स करा दी। शाम के समय दिलीप कुमार जी और धरम जी की वो पहली मुलाकात हुई। दिलीप साहब ने धरम जी से बड़े प्यार से बात की। मानो वो सच में उनके बड़े भाई हों।
दिलीप कुमार ने अपनी महंगी जैकेट धरम जी को दी
उन दिनों सर्दियों का मौसम था। बाहर काफी ठंड पड़ रही थी। और धरम जी ने बस एक कमीज़ पहन रखी थी। दिलीप साहब ने अपनी एक जैकेट लाकर धरम जी को दी। वो एक महंगी जैकेट थी जो पेरिस में बनी थी। धरम जी ने हमेशा उस जैकेट को अपने पास संभालकर रखा। ये पूरी कहानी धर्मेंद्र जी ने अपनी बायोग्राफ़ी के लिए पत्रकार राजीव एम. विजयकर जी को बताई थी। अगर आप राजीव एम. विजय द्वारा लिखित धर्मेंद्र जी की बायोग्राफ़ी “धर्मेंद्र: नोट जस्ट ए ही-मैन” पढ़ेंगे तो उसमें शुरुआत में ही ये कहानी आपको पढ़ने को मिलेगी।
सनी की पहली फिल्म बनाने से पहले भी दिलीप जी से मिले
एक और किस्सा है धरम जी का जो सायरा बानो जी ने अपने इंस्टाग्राम के ज़रिए एक दफा बताया था। छोटा सा किस्सा। वो भी जान लेते हैं। धरम जी अपने बड़े बेटे सनी देओल को फिल्म इंडस्ट्री में लॉन्च करने जा रहे थे। फिल्म के मुहुर्त से ठीक एक रात पहले धरम जी दिलीप साहब के घर पहुंचे। उन्होंने सनी की ढेर सारी तस्वीरें दिलीप साहब के सामने रख दी। फिर उन्होंने दिलीप साहब को बताया कि जिस लड़की को उन्होंने सनी की पहली हीरोइन के तौर पर साइन किया है वो दिलीप साहब के छोटे भाई नासिर खान और उनकी पत्नी बेगम पारा की रिश्तेदार है। उसका नाम अमृता सिंह है। दिलीप साहब ने धरम जी की हौंसलाअफज़ाई की और उन्हें बेताब फिल्म की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दी।
धरम जी की दिलीप कुमार के साथ काम करने की थी तमन्ना
धरम जी की बड़ी तमन्ना थी कि उन्हें किसी फिल्म में दिलीप साहब के साथ काम करने का मौका मिले। मगर उनकी ये तमन्ना वैसे पूरी ना हो सकी जैसे वो चाहते थे। धरम जी चाहते थे कि कोई ऐसी फिल्म बने जिसमें दिलीप साहब और वो लीड भूमिकाओं में दिखें। मगर ऐसी कोई फिल्म ना बन सकी। हालांकि साल 1966 में बांग्ला फिल्म पारी में दिलीप कुमार जी ने एक गेस्ट रोल किया था। उस फिल्म में धरम जी का बड़ा अहम किरदार था। 1972 में यही बांग्ला फिल्म हिंदी में बनाकर अनोखा मिलन नाम से रिलीज़ की गई।
8 दिसंबर 1935 को पंजाब में पैदा हुए धर्मेंद्र
भारत के फिल्मी इतिहास में धर्मेंद्र एक ऐसा नाम है, जिसे ‘ही-मैन’ की उपाधि से नवाज़ा गया। 8 दिसंबर 1935 को पंजाब में पैदा हुए धर्मेंद्र ने बेहद साधारण परिवेश से मायानगरी मुंबई तक का सफर पूरा किया। हिंदी सिनेमा में उनका प्रवेश 1960 की फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से हुआ था। शुरुआत के संघर्षों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने अभिनय, मेहनत और व्यक्तित्व से सबको अचंभित कर दिया।
छह दशकों में लगभग 300 से अधिक फिल्मों में काम किया
हिंदी सिनेमा में उनका प्रवेश 1960 की फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से हुआ था। शुरुआत के संघर्षों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने अभिनय, मेहनत और व्यक्तित्व से सबको अचंभित कर दिया। धर्मेंद्र ने छह दशकों में लगभग 300 से अधिक फिल्मों में काम किया और हर तरह के किरदारों में खुद को साबित किया। रोमांटिक हीरो, कॉमेडी रोल, एक्शन—सभी में उनकी लोकप्रियता बरकरार रही।
‘फूल और पत्थर’ ने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया
‘फूल और पत्थर’ ने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया। उसके बाद ‘शोले’, ‘आंखें’, ‘चुपके चुपके’, ‘सीता और गीता’, ‘धरम वीर’ जैसी फिल्में आज भी सिनेप्रेमियों की पसंदीदा हैं। ‘शोले’ में वीरू के किरदार ने उन्हें अमर कर दिया। धर्मेंद्र का रिकॉर्ड भी खास है: 1973 में एक साल में आठ हिट फिल्में दीं, और 1987 में अपना ही रिकॉर्ड तोड़कर नौ सुपरहिट फिल्में दीं। सिने प्रेमियों और इंडस्ट्री के लिए वे हमेशा एक प्रेरणा रहे हैं। उनका संघर्ष, अपने परिवार के लिए समर्पण और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण हर पीढ़ी के लिए सीख है।
धर्मेंद्र को कई सम्मान मिले
धर्मेंद्र को अनेक सम्मान मिले, जिनमें 1997 का फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और भारत सरकार द्वारा 2012 का पद्म भूषण शामिल है। उन्होंने अपने बेटों सनी देओल और बॉबी देओल को भी अच्छी संस्कार और मार्गदर्शन दिया, और खुद निर्माता भी बने—उनकी प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘घायल’ को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। 24 नवंबर 2025 को धर्मेंद्र ने अंतिम सांस ली। यूं तो एक युग समाप्त हो गया, मगर उनकी फिल्मों, संवादों, और मुस्कान से वे जनता के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे। ऐसे कलाकार बार-बार जन्म नहीं लेते—उनकी आत्मा को शांति मिले!
अपने पीछे ढेर सारी यादगार फिल्में छोड़ गए
एक्टर अपने पीछे न सिर्फ यादगार फिल्में छोड़ गए, बल्कि इंडस्ट्री में अपने शुरुआती सालों की अनगिनत दिल को छू लेने वाली कहानियां भी छोड़ गए। ऐसा ही एक पल सलमान खान के गेम शो ’10 का दम’ से वायरल हुए वीडियो में देखने को मिला, जहां उन्होंने खुलकर बताया कि उन्होंने अपनी पहली फिल्म के लिए कितना कमाया और उसे कैसे खर्च किया।
धर्मेंद्र की पहली कमाई
वह इस एपिसोड में अपने बड़े बेटे सनी देओल के साथ आए थे। गेम शो में 1 लाख जीतने के बाद सलमान ने धर्मेंद्र से पूछा कि जब वह एक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए पंजाब से मुंबई आए थे तो उनके लिए उस रकम का क्या मतलब था। धर्मेंद्र ने तुरंत जवाब दिया, ‘उस समय लाख रुपये… हे भगवान।’ फिर सलमान ने उनसे उनकी पहली फिल्म की सैलरी के बारे में पूछा। धर्मेंद्र ने मुस्कुराते हुए याद किया, ‘3,500-7,000 ऐसा था कुछ पर उससे पहले एक और फिल्म मिली थी, अर्जुन हिंगोरानी की। तीन पार्टनर थे और मैं केबिन के किनारे बैठा था सोच रहा था कि मुझे कम से कम 5,000 मिलेंगे, लेकिन उन्होंने साइनिंग अमाउंट के तौर पर सिर्फ 51 दिए।’
धर्मेंद्र ने कैसे खर्च की थी अपनी पहली कमाई
धर्मेंद्र ने बताया कि उन्होंने 51 रुपये से शराब खरीदी ताकि वह अपने दोस्तों के साथ सेलिब्रेट कर सकें। याद करते हुए हंसते हुए उन्होंने कहा, ‘जब हमने अपना पहला पैग लिया तो मैंने गिलास को रूमाल से पकड़ा ताकि उस पर मेरे फिंगरप्रिंट न लगें। मुझे लगा कि अगर पुलिस ने मुझे पकड़ लिया तो मेरा करियर खत्म हो जाएगा।’ फिर एक्टर ने मजाक में कहा, ‘तीसरे पैग तक, मैंने रूमाल छोड़ दिया।’
धर्मेंद्र को था इस बात का डर
हममें से ज्यादातर लोगों की तरह दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के मन में भी यह सवाल था, अगर वह फेल हो गए तो क्या होगा? ‘अगर यह काम नहीं किया तो?’ जब रजत शर्मा ने पूछा कि क्या उन्हें कभी डर लगा कि उनका सपना टूट सकता है तो धर्मेंद्र ने बिना झिझक के बताया। उन्होंने एक ऐसी याद शेयर की जो मजेदार और दिल को छू लेने वाली थी। एक युवा स्ट्रगलर की झलक जो एम्बिशन और जिम्मेदारी के बीच बैलेंस बनाता है। उन्होंने कहा, ‘जब मैंने थोड़ा कमाना शुरू किया तो मैंने एक फिएट खरीदी। इसकी कीमत लगभग 18,000 रुपये थी। मेरे भाई अजीत ने कहा कि पाजी, आपको एक हेराल्ड खरीदनी चाहिए थी; एक खुली कार हीरो को ज्यादा सूट करती है।’
अगर फिल्मों में न होते तो भाई अजीत के साथ टैक्सी चलाते
मुस्कुराते हुए, उन्होंने बताया कि उस दिन उन्होंने अपने भाई से क्या कहा था, ‘अजीत इस इंडस्ट्री पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मैं छोड़ना नहीं चाहता, लेकिन अगर मुझे छोड़ना पड़ा तो मैं कुछ बनकर जाऊंगा और अगर समय उम्मीद से ज्यादा लगा तो हम इस फिएट को टैक्सी बना देंगे। हम इसे साथ में चलाएंगे।’ यह एक ऐसी कहानी है जो आपको तुरंत याद दिलाती है कि जिस सुपरस्टार ने बाद में भारतीय सिनेमा पर राज किया। वह कभी रिस्क का हिसाब लगा रहा था, असल जिंदगी के लिए बैकअप प्लान बना रहा था, एक आम नौजवान की तरह सोच रहा था जो गिरने का रिस्क नहीं ले सकता था। उन्होंने आगे कहा, ‘मुझमें हमेशा जिम्मेदारी का एहसास था’
बॉलीवुड सुपरस्टार की कहानी
अब यह लगभग सिनेमा जैसा लगता है। वह हीरो जिसने टैक्सी चलाते हुए अपने भविष्य की कल्पना की थी और एक दिन लाखों लोग सिनेमा हॉल के बाहर उसकी एक झलक पाने के लिए उसका पीछा करने लगे। धर्मेंद्र ने बताया था कि जब वह दिलीप कुमार और अन्य अभिनेताओं को देखते थे तो अक्सर मन ही मन सोचते थे, ‘ये खूबसूरत हस्तियां कहां से हैं? मुझे भी उनके बीच होना चाहिए… मैं तो वहीं का हूं।’ ऐसा हुआ भी धर्मेंद्र बॉलीवुड में सुपरस्टार बनकर उभरे।
धर्मेंद्र का सुपरहिट स्टारडम
धर्मेंद्र ने अपने शानदार फिल्मी सफर में हिंदी सिनेमा को कई हिट और ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। 60 और 70 के दशक में वह बॉक्स ऑफिस के सबसे पसंदीदा सितारों में गिने जाते थे। ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’, ‘धरम वीर’, ‘दोस्त’, ‘अनुपमा’, ‘सीता और गीता’, ‘कटी पतंग’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हर घर का प्रिय चेहरा बना दिया। धर्मेंद्र हिंदी सिनेमा के वो सुपरस्टार थे, जिन्होंने अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान से ज्यादा हिट फिल्में दी हैं। धर्मेंद्र ने 1960 में 24 साल की उम्र में ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद वे ‘बंदिनी’, ‘आई मिलन की बेला’ और ‘काजल’ जैसी हिट फिल्मों में सपोर्टिंग रोल में दिखे, लेकिन 1965 की फिल्म ‘हकीकत’ ने उन्हें बॉक्स ऑफिस पर एक हिट हीरो बना दिया।
धर्मेंद्र ने अपने करियर में दी सबसे हिट फिल्में
‘हकीकत’ से किस्मत चमकने के बाद ‘फूल और पत्थर’ रिलीज हुई, जिसने उन्हें एक स्टार बना दिया। इसके बाद, 1970 के दशक के आखिर तक, धर्मेंद्र लगातार बॉलीवुड के टॉप एक्टर में से एक बने रहे और उन्होंने ‘अनुपमा’, ‘आदमी और इंसान’, ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘शोले’, ‘लोफर’, ‘यादों की बारात’ और ‘धरम वीर’ जैसी कई हिट और सुपरहिट फिल्में दी।
धर्मेंद्र ने कितनी हिट फिल्में दी
80 के दशक में बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ ने एक्शन फिल्मों में काम करना शुरू किया और ‘बदले की आग’, ‘गुलामी’, ‘लोहा’ और ‘ऐलान-ए-जंग’ जैसी मूवीज में नजर आए। 64 साल के करियर में धर्मेंद्र ने 75 हिट फिल्में दीं, जो किसी भी हिंदी फिल्म एक्टर की लीड रोल वाली सबसे ज्यादा हिट फिल्में हैं। उनमें से 6 ब्लॉकबस्टर थीं। अमिताभ बच्चन (57), राजेश खन्ना (42), शाहरुख खान (35) और सलमान खान (38) जैसे सुपरस्टार्स ने अपने करियर में धर्मेंद्र से कम हिट फिल्में दी है। बता दें कि यह जानकारी अभी तक रिलीज हुई इस सभी स्टार्स की फिल्मों के अनुसार है।
(नोट : इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से साभार)










