लखनऊ। ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे अनऑफिशियल टेस्ट के दूसरे दिन भारत ए की बल्लेबाजी पूरी तरह से धराशायी रही। इकाना स्टेडियम पर भारत ए अपनी पहली पारी में महज़ 194 रन पर ऑल-आउट हो गई, जबकि मेहमान टीम ने दिन के अंत तक अपनी दूसरी पारी में 3 विकेट पर 16 बनाकर कुल 242 रन की बढ़त बना ली है।
ऑस्ट्रेलिया ए ने अपनी पहली पारी 420 पर घोषित की — इसके पीछे खास योगदान था टॉड मर्फी (76) और हेनरी थॉर्नटन (32) की निर्णायक दसवें विकेट की 91 रन की साझेदारी, जिसने मेहमानों को बड़ी बढ़त दिलाई।
जवाब में उतरी भारत ए की पारी में शुरुआत ही नाकाम साबित हुई — केएल राहुल सिर्फ 11 रन बनाकर पवेलियन लौटे। बीच में साईं सुदर्शन (75) और एन जगदीशन (38) ने सलामती की छोटी कोशिश की और टीम के लिए 100 से अधिक की साझेदारी करवाई, पर इसके टूटने के बाद मैच पर नियंत्रण करने में बाकी बल्लेबाज नाकाम रहे।
आयुष बडोनी (21) और प्रसिद्ध कृष्णा (16) के अलावा किसी भी बल्लेबाज ने दोहरे अंक पार नहीं किए। टीम 52.5 ओवर में 194 पर सिमट गई।
दिन के अंत तक भारतीय गेंदबाजों ने कुछ राहत की किरण दिखाई — मोहम्मद सिराज, गुरुनूर बरार और मानव सुथार ने मिलकर ऑस्ट्रेलिया ए की दूसरी पारी में तीन विकेट लिए और स्टम्प्स तक मेहमान टीम 16/3 पर टिककर रही।
केएल राहुल का जल्दी आउट होना और उसके बाद कोई भी नियमित ओपनिंग साझेदारी न बन पाना भारत के दिन की सबसे बड़ी कमजोरी रही। एक ठोस शुरुआत न होने से मध्य क्रम पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
वहीं सुदर्शन और जगदीशन ने अच्छी पारियां खेली पर उनके अलावा कोई भी बल्लेबाज बड़े बल्लेबाजी-सत्र पैदा नहीं कर पाया; दो या तीन छोटे योगदानों के सिवा टीम को कोई लंबी टिकाऊ पारियाँ नहीं मिलीं। दूसरी ओर अनौपचारिक टेस्ट में भी लंबी पारियों और साझेदारियों की कीमत बहुत बड़ी होती है, आज भारत ए उसी बिंदु पर चूका।
भारत ए के तेज-बल्लेबाज़ों ने (खासकर सिराज) कुछ खास मौके बनाए और अटैक में जीवन देखा गया। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में मिले तीन विकेट टीम को वापसी का रास्ता दे सकते हैं — पर यह तभी काम आएगा जब तीसरे दिन भारत ए शुरुआती विकेट लेकर मेहमानों की बढ़त पर टूट पड़े।
यह प्रदर्शन चयन समिति के लिए चिंता बढ़ाने वाला संकेत है। केएल राहुल जैसे अनुभवी खिलाड़ी का फेल होना और बाकी खिलाड़ियों का फ्लॉप जाना वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज़ से पहले सवाल खड़े करता है,
खासकर टीम में स्थिरता और टेस्ट क्रिकेट के लंबी पारियों के लिए भरोसेमंद बल्लेबाजों की जरूरत को देखते हुए। दूसरी ओर, सिराज, बरार और सुथार की गेंदबाजी से उम्मीद जगी है कि वे छोटे-छोटे झटकों से विपक्षी रनों की तेजी धीमी कर सकते हैं।
शुरुआती घंटे में नई गेंद से आक्रमक संभालना जरूरी होगा; पहले घंटे में दो-तीन विकेट लेकर दबाव बनाना भारत के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।
सुदर्शन-जैसे बल्लेबाजों को फिर से टिककर बड़ा शॉट खेलने का मौका देना होगा; किसी भी छोटी साझेदारी को जल्दी से तोड़ना हमें मेहमानों के खिलाफ वापसी का रास्ता दिखा सकता है।
गेंदबाजी में शॉर्ट-आवर्स, बदलती गति और लाइन-लेंथ से चुनौती देना होगा — खासकर तब जब मेहमान 350–400 के पार जाने की कोशिश करेंगे।










