भारत ने रविवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में सिर्फ मैच नहीं जीता, बल्कि यह साफ कर दिया कि मौजूदा टीम किस सोच के साथ आगे बढ़ रही है। 154 रन का लक्ष्य महज 10 ओवर में आठ विकेट से हासिल कर भारत ने न केवल मुकाबला जीता, बल्कि पांच मैचों की सीरीज़ में 3-0 की अजेय बढ़त के साथ ट्रॉफी भी अपने नाम कर ली।
इस जीत की सबसे बड़ी झलक थी भारत की निडर बल्लेबाजी और लाइन-अप की गहराई। अभिषेक शर्मा (नाबाद 68) और कप्तान सूर्यकुमार यादव (नाबाद 57) ने तीसरे विकेट के लिए सिर्फ 40 गेंदों में 102 रन की अटूट साझेदारी कर यह दिखा दिया कि भारत अब हालात के अनुसार नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर टी20 खेल रहा है।
दोनों बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही गेंदबाजों पर दबाव बनाया और मैच को आधे समय में ही खत्म कर दिया। अभिषेक शर्मा की पारी इस नई आक्रामकता का प्रतीक रही। सात चौके और पांच छक्कों से सजी उनकी पारी में उन्होंने भारत की ओर से दूसरा सबसे तेज टी20 अर्धशतक जमाया और युवराज सिंह के रिकॉर्ड से सिर्फ दो गेंद पीछे रह गए।
दूसरी ओर सूर्यकुमार यादव ने अपने ट्रेडमार्क स्कूप, फ्लिक और इनोवेटिव शॉट्स से यह दिखाया कि कप्तानी का बोझ उनके स्वाभाविक खेल पर असर नहीं डाल रहा। हालांकि भारत की शुरुआत लड़खड़ाई। संजू सैमसन एक बार फिर असफल रहे और पहली ही गेंद पर मैट हेनरी का शिकार बने।
इस सीरीज़ में उनके 10, 6 और 0 के स्कोर ने चयन को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है, खासकर तब जब ईशान किशन लगातार मौके का फायदा उठाते दिख रहे हैं। रायपुर में 76 रन की मैच जिताऊ पारी के बाद ईशान ने इस मैच में भी हेनरी के एक ओवर में दो छक्के और एक चौका जड़कर अपने इरादे साफ कर दिए।
ईशान के आउट होने के बावजूद भारत की रफ्तार थमी नहीं। पावरप्ले में दो विकेट पर 94 रन बनाकर भारत ने इस साल इंग्लैंड के खिलाफ बनाए गए 95 रन के अपने ही रिकॉर्ड के करीब पहुंचते हुए मैच का रुख पूरी तरह पलट दिया।
इससे पहले गेंदबाजी में भारत ने अनुशासन और विविधता का बेहतरीन नमूना पेश किया। लगभग एक साल बाद टीम में लौटे रवि बिश्नोई ने मौके को दोनों हाथों से भुनाया और चार ओवर में 18 रन देकर दो विकेट झटके।
जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या ने शुरुआत में ही न्यूजीलैंड को बैकफुट पर धकेल दिया, जिससे मेहमान टीम पावरप्ले में 34 रन पर तीन विकेट गंवा बैठी।
बुमराह ने चार ओवर में 17 रन देकर तीन विकेट चटकाए और एक बार फिर दिखाया कि बड़े मैचों में उनका असर कितना निर्णायक होता है। हार्दिक ने गेंद और फील्डिंग दोनों से योगदान दिया, जबकि बिश्नोई ने मध्य ओवरों में रन गति पर ब्रेक लगाते हुए ग्लेन फिलिप्स को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोका।
मार्क चैपमैन और फिलिप्स की 52 रन की साझेदारी ने न्यूजीलैंड को थोड़ी राहत जरूर दी, लेकिन वह भारत की मजबूत गेंदबाजी के सामने नाकाफी साबित हुई। न्यूजीलैंड की टीम 20 ओवर में नौ विकेट पर 153 रन ही बना सकी।
कुल मिलाकर यह जीत भारत की मौजूदा टी20 टीम की मानसिकता को दर्शाती है—जहां हर खिलाड़ी योगदान देने को तैयार है और जीत किसी एक नाम पर निर्भर नहीं।
सीरीज़ का चौथा मुकाबला 28 जनवरी को विशाखापत्तनम में खेला जाएगा, लेकिन उससे पहले ही भारत ने यह संदेश दे दिया है कि यह टीम सिर्फ जीतने नहीं, बल्कि दबदबे के साथ खेलने आई है।










