बेबाक/संजीव मिश्र
विजय हजारे ट्रॉफी में यूपी खूब खेला। क्वार्टर फाइनल में उसके बल्लेबाजों ने टूर्नामेंट के दो टॉप बल्लेबाजों के जल्दी आउट हो जाने के बावजूद स्कोर को 310 तक पहुंचा दिया। यह टोटल डिफेंड किया जा सकता था। नहीं हो सका तो कोई बात नहीं। यह खेल में होता है, जब शानदार प्रदर्शन करने वाली टीम के लिए भी एक दिन खराब आता है। हां यह दुर्भाग्य है कि यूपी के लिए टूर्नामेंट में वो खराब दिन सौराष्ट्र के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले का ही निकला।
इस विकेट पर 360 से 375 रन बनाने चाहिए थे
शीर्ष और मध्यक्रम न लड़खड़ाता तो यूपी इस मैच में भी विपक्षी टीम पर भारी पड़ सकता था, क्योंकि बीसीसीआई के सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस के जिस विकेट पर यह मैच खेला गया, वहां बल्लेबाजी करना कठिन नहीं था और गेंद आसानी से बल्ले पर आ रही थी। कप्तान रिंकू सिंह और आर्यन जुयाल का बल्ला चल गया होता तो यूपी इस मैच में 360 से 375 तक आसानी से पहुंच सकता था।
यह रही टूर्नामेंट से बाहर होने की असली वजह
ध्रुव जुरेल इस मैच के लिए उपलब्ध नहीं होंगे यह पहले ही तय हो चुका था, जबकि उनके रिप्लेसमेंट के तौर पर आए रितुराज शर्मा फ्लॉप रहे। ध्यान रहे कि यूपी को लगातार जो 7 जीत मिलीं थीं वो बल्लेबाजी और गेंदबाजी के बेहतरीन कॉम्बिनेशन का ही कमाल था। लेकिन दुर्भाग्यवश नॉक आउट मुकाबले में हम इसे जारी नहीं रख सके। टॉप और मिडिल ऑर्डर के लड़खड़ाने से रन गति घटी और परिणाम यह निकला कि जितने रन होने चाहिए थे, यूपी के खाते में नहीं लग सके। दरअसल पूरे टूर्नामेंट जो बल्लेबाज और गेंदबाज छाए रहे उनका सबसे महत्वपूर्ण मैच में सबसे खराब प्रदर्शन आया।
कभी-कभी ऐसा भी होता है
8 मैचों में सबसे ज्यादा 558 रन बनाने वाले ध्रुव जुरेल इस टीम में नहीं थे। इतने ही मैचों में 139.89 के स्ट्राइक रेट और 105.25 के शानदार औसत से 421 रन बनाने वाले कप्तान रिंकू सिंह क्वार्टर फाइनल में सिर्फ 13 रन ही बना सके। इसके अलावा दो शतकों और दो अर्द्धशतकों के साथ 492 रन बनाने वाले सलामी बल्लेबाज आर्यन जुयाल इस अहम मुकाबले में शून्य पर ही आउट हो गए। यानि जो यूपी के टॉप थ्री बल्लेबाज थे उनमें से एक तो खेल नहीं रहा था और बाकी जो दो खेल रहे थे वे टूर्नामेंट का अपना सबसे खराब प्रदर्शन कर बैठे। खैर! कभी-कभी ऐसा भी होता है।
बड़े मैच में फेल हो गई यूपी की स्पिन तिकड़ी
इसके बावजूद अभिषेक गोस्वामी और समीर रिज़वी ने प्रियम गर्ग, प्रशांत वीर और जीशान अंसारी के साथ मिलकर टीम का स्कोर 310 रन तक पहुंचा ही दिया था जो यूपी की गेंदबाजी को देखते हुए डिफेंड किया जा सकता था। लेकिन किसे मालूम था कि टूर्नामेंट का टॉप गेंदबाज जीशान अंसारी इस मुकाबले में विकेट के लिए तरस जाएगा। विप्रज निगम और प्रशांत वीर भी ऐन मौके पर चूक गए। एक तरह से इस बड़े मैच में स्पिन तिकड़ी पूरी तरह फेल हो गई। तारीफ करनी होगी सौराष्ट्र के विकेट कीपर बल्लेबाज हरविक देसाई, प्रेरक मांकड़ और चिरांग गनी की, जिन्होंने यूपी के स्पिनर्स को हावी नहीं होने दिया।
यूपी टीम मैनेजमेंट को गौतम गंभीर का शुक्रगुजार होना चाहिए
यूपी टूर्नामेंट से भले ही बाहर हो गया हो लेकिन उसने इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करके भविष्य के लिए एक उम्मीद जरूर जगा दी है। हालांकि यूपी के इस प्रदर्शन में उन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की भूमिका नहीं भूलनी चाहिए जो टीम इंडिया से फ्री रहने पर घरेलू क्रिकेट खेलने को बाध्य थे। अच्छी बात यह है कि ध्रुव जुरेल और रिंकू सिंह ने इस प्लेटफॉर्म को टीम इंडिया में वापसी करने का जरिया बना अपना सौ प्रतिशत दिया। यह स्वीकारने में हर्ज नहीं होना चाहिए कि हेड कोच गौतम गंभीर का टीम इंडिया के खिलाड़ियों को डोमेस्टिक क्रिकेट खेलने के लिए मजबूर करने का फायदा यूपी को मिला है। यदि यह दबाव न होता तो यूपी के स्टार खिलाड़ी विजय हजारे ट्रॉफी में शायद ही खेलते। कायदे से तो इस मामले में यूपी टीम मैनेजमेंट को गौतम गंभीर का शुक्रगुजार होना चाहिए
रिंकू सिंह की कप्तानी की तारीफ भी होनी चाहिए
यूपी भले ही नॉक आउट दौर में अपनी चुनौती सेमीफाइनल तक न पहुंचा सका लेकिन 32 टीमों में यही एकमात्र टीम ऐसी थी, जो अपना एक भी लीग मुकाबला गवांए बिना क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी। यह रिकॉर्ड रिंकू सिंह की कप्तानी में बना। रिंकू ने टीम का नेतृत्व काफी मैच्योर तरीके से किया। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि इस टूर्नामेंट से यूपी को तीनों फॉर्मेट के लिए रिंकू सिंह के रूप में एक काबिल कप्तान मिलने जा रहा है। जहां तक हेड कोच अरविन्द कपूर और सहायक कोच आमिर खान की बात है तो दोनों को जब अच्छी टीम मिली तो उन्होंने काफी हद तक अच्छा रिजल्ट भी दिया। अब यह चीफ सलेक्टर प्रवीण कुमार के ऊपर है कि वे भविष्य में टीम मैनेजमेंट को कैसे खिलाड़ी उपलब्ध करवाते हैं।










