– उड़ीसा के खिलाफ ड्रॉ मुकाबले से यूपी को फिर मिले सिर्फ तीन अंक
-बैड लाइट व बारिश के चलते अंतिम दिन भी 50 ओवर का खेल नहीं हो सका
कानपुर। क्रिकेट अब नए ढंग से प्लान होता है। मैच से एक हफ्ता पहले से सिर्फ विकेट और विपक्षी टीम के बारे में ही जानकारी नहीं जुटाई जाती, बल्कि अब मौसम विभाग भी दोनों टीमों के लिए किसी भी मैच की प्लानिंग का खास रणनीतिकार होता है। यूपी का नया टीम मैनेजमेंट और कप्तान शायद यहीं चूक कर बैठा। उड़ीसा के खिलाफ ग्रीनपार्क स्टेडियम में खेले गए एलीट ग्रुप ए के रणजी ट्रॉफी मुकाबले में तीसरे और चौथे दिन के खेल पर नजर डालें तो लगभग एक दिन का खेल बारिश ने खराब कर दिया। लेकिन यदि यूपी टीम थोड़ा सतर्क रहती तो उसे सीजन के अपने दूसरे मुकाबले में भी सिर्फ तीन अंकों से ही सब्र न करना पड़ता।
यूपी की धीमी बल्लेबाजी ने मैच की कहानी बदली
दूसरे दिन यूपी की धीमी बल्लेबाजी ने भी मैच की कहानी बदल दी। आक्रामक बल्लेबाजी से अच्छी लीड लेकर उड़ीसा को तीसरे दिन चाय के बाद मैदान में उतारा जा सकता था। लेकिन यूपी ने पूरे दिन बल्लेबाजी की और 86 ओवर खेलने के बावजूद सिर्फ 247 रन ही बनाए। तीसरे दिन से मौसम का खेल शुरू हो चुका था लेकिन इस दिन भी 32 ओवर में यूपी ने सिर्फ 118 रन ही बनाए। यदि मौसम की भविष्यवाणी को ध्यान में रखकर बल्लेबाजों ने गेयर बदले होते तो इस मुकाबले का कम से कम इतना नीरस अंत तो न हुआ होता। दोनों टीमों के बीच खेला गया यह मुकाबला मंगलवार को ड्रॉ रहा। अपने ग्रुप में यूपी टीम दो मैचों से 6 अंकों के साथ विदर्भ, झारखंड और बड़ौदा के बाद चौथे स्थान पर है। उसके ऊपर की सभी टीमें एक-एक मुकाबला जीत चुकी हैं। यूपी को ग्रीनपार्क में अंतिम बार 2019 में गोआ के खिलाफ सीधी जीत मिली थी।
सुबह आउटफील्ड गीली होने की वजह से खेल देर से शुरू हुआ
आज सुबह आउटफील्ड गीली होने की वजह से खेल देर से शुरू हुआ। इसके बावजूद यूपी टीम के कप्तान ने बल्लेबाजी जारी रखने का फैसला लिया, जो कि समझ से परे रहा। हां, दो ओवर और खेलकर विप्रज निगम (31) और शिवम मावी (नाबाद 12) ने तेजी के साथ कल के स्कोर में 29 रन और जोड़ टीम की कुल बढ़त 166 रनों तक पहुंचा दी। यही तेजी यदि दूसरे व तीसरे दिन दिखती तो कुछ मेजबान टीम को इसका लाभ मिलता। जब स्कोर 6 विकेट पर 409 रन था तब यूपी ने पारी की घोषणा कर दी गई। हालांकि उड़ीसा को देर से बल्लेबाजी करने का फायदा ही मिला।
यूपी के कप्तान के पास हाथ मलने के अलावा कोई चारा नहीं था
कल रात रुक-रुक कर होती रही बारिश से विकेट में जो नमी थी, यूपी के सीमर्स मैच में बार-बार पड़ने वाली बाधा की वजह से उसका फायदा नहीं उठा सके। जब उड़ीसा की टीम अपनी दूसरी पारी खेलने उतरी तो मीडियम पेसर शिवम मावी ने दो विकेट लेकर कुछ समय के लिए हलचल जरूर मचाई लेकिन आकाश में मंडराते बादल और तेजी से निकलते समय के चलते यूपी के कप्तान करन शर्मा के पास हाथ मलने के अलावा कोई चारा नहीं था। तीसरे दिन भी एक बजकर 11 मिनट के बाद बारिश और बैड लाइट की वजह से खेल नहीं हो सका था। तब भी कुल 48 ओवरों का खेल खराब हुआ था।
चौथे दिन 50 ओवर का खेल खराब हुआ
चौथे और अंतिम दिन के खेल में पहले तो सुबह 4 ओवर का खेल खराब हुआ उसके बाद 46 ओवर का खेल बारिश और खराब रोशनी की वजह से नहीं हो सका। अपराह्न 2 बजकर 49 मिनट पर खराब रोशनी और फिर शाम 3 बजकर 9 मिनट पर बारिश की वजह से मैच रोका गया। इस समय उड़ीसा के दूसरी पारी में स्कोर 3 विकेट पर 151 रन था। इसके बाद शाम 3:32 बजे दोनों कप्तानों ने रिजल्ट की कोई संभावना न देखते हुए ड्रॉ के लिए हाथ मिला लिया। चौथे दिन 50 ओवर का खेल खराब हुआ। यही कारण रहा कि मेहमान टीम शिकस्त से बच गई। खराब हुए ओवरों की संख्या देखें तो कह सकते हैं कि यह मैच तीन ही दिन का हुआ।
जब यूपी के लिए उम्मीदों के दिए कुछ देर जगमगाए
उड़ीसा का स्कोर एक समय 3 विकेट पर 79 रन हो गया था और यूपी के खेमे में उम्मीदों के दिए अचानक जगमगा उठे थे लेकिन सलामी बल्लेबाज स्वास्तिक सावल नाबाद ने 71 और गोविंदा पोद्दार ने नाबाद 38 रन बनाकर टीम को संभाल लिया। दोनों के बीच चौथे विकेट पर 72 रनों की अटूट साझेदारी ने मैच में यूपी के लिए जीत की कोई भी गुंजाइश खत्म कर दी। आशीर्वाद स्वाइन (23) और संदीप पटनायक (5) को शिवम मावी, जबकि कप्तान सुभ्रांशु सेनापति (11) कुनाल त्यागी ने अपना शिकार बनाया।
चौथे दिन के कुछ निर्णय चौंकाने वाले रहे
कप्तान करन शर्मा के चौथे दिन के कुछ निर्णय चौंकाने वाले रहे। यह इतिहास रहा है कि कितना भी पाटा विकेट हो लेकिन सुबह के समय गंगा किनारे स्थित इस स्टेडियम के विकेट पर नमी स्वाभाविक रूप से सीमर्स को मदद करती है, फिर यहां तो बारिश हो जाने से विकेट और भी नम हो गया था। मौसम पूरी तरह पेसर्स का मददगार बन चुका था। इसके बावजूद करन शर्मा ने सुबह अपने सीमर्स को जल्दी विकेट निकालकर उड़ीसा को दबाव में लाने के बजाए अपने बल्लेबाजों को पारी जारी रखने भेज दिया। इसके बाद जब उड़ीसा की दूसरी पारी शुरू हुई तो दोनों छोर से पेस अटैक की बजाए एक छोर से स्पिनर शिवम शर्मा से गेंद डलवाई, जबकि अंतिम दिन गिरे तीनों विकेट पेसर्स को ही मिले।
करन शर्मा ने भी बहुत अच्छी कप्तानी नहीं दिखाई
उड़ीसा को पहली पारी में 243 रनों पर समेटने के बाद यूपी की बल्लेबाजी में कोई प्लानिंग नहीं नजर आई। आर्यन जुयाल से कप्तानी लेकर करन शर्मा को सौंपे जाने के पीछे शायद पिछले सीजन के कप्तान के कुछ गलत फैसले भी रहे होंगे लेकिन करन शर्मा ने भी बहुत अच्छी कप्तानी नहीं दिखाई। यूपी के लिए पहले दो मैचों में घरेलू विकेट का फायदा उठाने का मौका था, जो हाथ से निकल चुका है। उसके लिए आगे परिस्थितियां बहुत अनुकूल नहीं रहने वाली, क्योंकि अब यूपी का मजबूत टीमों से मुकाबला होना है। उसको अपना अगला मैच बड़ौदा के खिलाफ उसी के विकेट पर खेलना है।










