बेबाक/संजीव मिश्र
चौथे टेस्ट के अंतिम 15 मिनट की टसल ओवल तक पहुंच चुकी है। वजह अलग-अलग रहीं लेकिन अंग्रेजों का लक्ष्य भारत को बेवजह के विवादों में उलझाकर किसी भी तरह पांचवें टेस्ट के साथ सीरीज जीतना है। पहले तो चौथे टेस्ट में रवीन्द्र जडेजा और वाशिंगटन सुंदर के शतक के करीब होने पर इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने मैच ड्रॉ घोषित करवाने के लिए बल्लेबाजों पर दबाव बनाया और न मानने पर हैरी ब्रुक से 37 किमी की रफ्तार से गेंद डलवारकर तंज कसे। इसके बाद ओवल के क्यूरेटर ने हेड कोच गौतम गंभीर से बेवहज उलझकर भारत को उकसाने का काम किया। दरअसल जो माइंड गेम खेला जा रहा है उसे टीम इंडिया के हेड कोच और उनकी टीम बहुत अच्छी तरह समझती है और इसका जवाब ओवल में देने में पूरी तरह से सक्षम भी है।
विवादों से ड्रेसिंग रूम का माहौल गरम
31 जुलाई से शुरू हो रहे ओवल टेस्ट के लिए अंग्रेज क्यूरेटर और हेड कोच गौतम गंभीर के बीच हुई बहस ने टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम के माहौल में गर्मी ला दी है। असल में भारत के लिए पलटवार का यही सही समय है। गंभीर का मिजाज भी विराट कोहली से कुछ कम गर्म नहीं, बल्कि कभी-कभी तो वह कुछ ज्यादा आक्रामक नजर आते हैं। संभव है कि वे गुस्से का इजहार मैदान में अपनी टीम से शानदार प्रदर्शन करवाकर करें। अंतिम टेस्ट से एक दिन पूर्व इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स और उसके स्टार गेंदबाज जोफ्रा आर्चर समेत चार खिलाड़ी प्लेइंग इलेवन से बाहर हो गए हैं, इसलिए टीम इंडिया के पास अब बड़ा मौका है। यानि लोहा भी गरम है और हथौड़े के तगड़े वार की भी जरूरत है। और हां अंग्रेजों को लगातार की जा रही बदतमीजी का जवाब तो मिलना ही चाहिए।
फाइटर की छवि बना रही है टीम इंडिया
रोहित शर्मा, विराट कोहली, आर अश्विन के बगैर सालों बाद किसी बड़े विदेश दौरे पर जाने वाली भारतीय टीम ने इंग्लैंड में एक फाइटर टीम की छवि बनाई है। ओल्ड ट्रैफर्ड में चौथे टेस्ट के अंतिम दिन जो जज्बा दिखाया, उसने बेन स्टोक्स समेत सभी इंग्लिश खिलाड़ियों के होश उड़ाकर रख दिए। मौजूदा भारतीय टीम में पुरानी आस्ट्रेलियाई टीमों की तरह अंतिम समय तक सरेंडर न करने की जिद दिखाई देती है, जो कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए अच्छे संकेत हैं। भारत के लिए ओवल टेस्ट काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि शुभमन गिल कतई नहीं चाहेंगे कि वे विदेशी सरजमीं पर अपनी कप्तानी में पहली सीरीज हारें। लेकिन इसके लिए उन्हें हर हाल में अंतिम टेस्ट जीतना होगा।
गेंदबाजों को भी उठानी होगी जिम्मेदारी
पांच टेस्ट की 1-2 से पीछे चल रही भारतीय टीम के लिए इस सीरीज में बल्लेबाज तो अपना रोल एक दो मौकों को छोड़ ठीक से निभाते रहे हैं पर उसकी गेंदबाजी लगातार सिर दर्द ही बनी हुई है। कुछ मौकों को छोड़ टीम इंडिया के आक्रमण में एक बार भी पैनापन नजर नहीं आया। इस बार गेंदबाजों को भी अपने हिस्से की जिम्मेदारी उठानी होगी। टीम के मुख्य गेंदबाज की खराब फिटनेस के अलावा आकाश दीप और अर्शदीप सिंह की इंजरी ने भी टीम को कमजोर किया। इसके अलावा प्लेइंग इलेवन के उचित चयन में चूक भी टीम इंडिया को अब तक भारी ही पड़ी है।
मैच विनर गेंदबाज को अब तक बाहर ही क्यों बैठाए रहे
आश्चर्यजनक यह है कि टीम का थिंक टैंक ने अपने सबसे आक्रामक और मैच विनर गेंदबाज कुलदीप यादव को चार टेस्ट मैचों में मौका ही नहीं दिया, जबकि फिटनेस के मामले में कमजोर बुमराह से सीरीज में सबसे ज्यादा गेंदबाजी करवाई जाती रही। यहां हेड कोच और कप्तान शुभमन गिल के फैसले मैच प्लानिंग में उनकी कमजोरी उजागर करते हैं। ज्यादा गेंदबाजी करने से अपनी लय भटकने वाले बुमराह मैनचेस्टर टेस्ट में लंगड़ाते नजर आए थे। अंग्रेज बल्लेबाजों ने उनके खिलाफ सौ से ज्यादा रन भी बनाए जिससे इस स्टार गेंदबाज के कांन्फिडेंस में भी कमी आई होगी।
गलत प्लेइंग इलेवन चुनी तो सीरीज भी गई समझो
अंतिम टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में कोई भी चूक सीरीज गंवाने की वजह बन सकती है। इस बार भी टीम में बदलाव होंगे, कितने यह तय नहीं। लेकिन तीन से चार बदलाव तो नजर आ ही रहे हैं। पैर में चोट की वजह से रिषभ पंत इस टेस्ट में नहीं खेलेंगे। उनकी जगह ध्रुव जुरेल की इन्ट्री लगभग तय है। अंशुल कंबोज डेब्यू मैच में कोई प्रभाव नहीं छोड़ सके थे। सीरीज के शुरुआती मैच होते तो उन्हें एक मौका और देना बनता था लेकिन जिस मैच में सीरीज दांव पर लगी है उसमें टीम मैनेजमेंट कोई रिस्क नहीं लेना चाहेगा। उनकी जगह अर्शदीप सिंह को डेब्यू का मौका मिल सकता है।
गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन से ही बचेगी सीरीज
टीम इंडिया अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में संतुलन मांगती है। ऐसे में चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव को मौका देना जरूरी हो जाता है। वह शार्दूल ठाकुर की जगह ले सकते हैं। लेकिन यह तभी संभव है जब कप्तान तीन पेसरों के साथ ही उतरने का फैसला करे। यदि चार पेसर खेलते हैं तो कुलदीप यादव को इस सीरीज में बिना मैच खेले ही लौटना पड़ेगा। ध्यान रहे कि इंग्लैंड की टीम में ऑलराउंडरों की भरमार ही, जबकि टीम इंडिया के पास दो ऑलराउंडर समेत कुल सात ही बल्लेबाज हैं। ऐसे में साफ है कि गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन ही सीरीज 2-2 से ड्रॉ छुड़ाई जा सकती है।
बुमराह को आराम देना ही बेहतर
तीसरे और चौथे टेस्ट में हमारे सबसे भरोसेमंद गेंदबाज बुमराह का खौफ जिस कदर घटा उसको ध्यान में रखते हुए इस गेंदबाज को आराम देना ही उसके और टीम के हित में होगा। किसी भी गेंदबाज पर आप घोड़े की तरह पूरा बोझ डालकर रेलते रहते हैं तो वह विपक्षी बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहली नहीं रह जाता है। बुमराह को वैसे भी वर्क लोड मैनेजमेंट के तहत सीरीज में तीन ही मैच खेलने थे, जो बुमराह खेल ही चुके हैं। बुमराह की जगह आकाश दीप की वापसी हो सकती है, जो कि इंजरी की वजह से टीम से बाहर हो गए थे।
भारत की प्लेइंग इलेवन कुछ ऐसी भी बन सकती है-
यशस्वी जयसवाल, केएल राहुल, कप्तान शुभमन गिल, साईं सुदर्शन, रवीन्द्र जडेजा, वाशिंगटन सुंदर, ध्रुव जुरेल, आकाश दीप, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज।
इंग्लैंड की प्लेइंग इलेवन: जैक क्रॉली, बेन डकेट, ओली पोप (कप्तान), जो रूट, हैरी ब्रुक, जैकब बेथेल, जेमी स्मिथ (विकेटकीपर), क्रिस वोक्स, गस एटकिंसन, जेमी ओवरटन, जोश टंग










