लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी के पहले सेमीफाइनल का पहला दिन पूरी तरह कर्नाटक के नाम रहा। टीम ने अनुभव और धैर्य का ऐसा मिश्रण दिखाया कि उत्तराखंड की गेंदबाजी इकाई पूरे दिन जूझती नजर आई। शुरुआती झटके के बाद जिस तरह कर्नाटक ने पारी को संभाला, उसने मुकाबले की दिशा तय कर दी।
पारी की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। मयंक अग्रवाल जल्दी पवेलियन लौट गए और स्कोरबोर्ड पर सिर्फ 18 रन जुड़े थे। लेकिन इसके बाद केएल राहुल और कप्तान देवदत्त पडीक्कल ने जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 278 रन की लंबी और मैच की धुरी साबित होने वाली साझेदारी की।
राहुल ने 211 गेंदों पर 141 रन की नियंत्रित पारी खेली। 11 चौकों और 5 छक्कों से सजी उनकी पारी में जल्दबाजी नहीं, बल्कि क्लास और चयनित आक्रामकता नजर आई। यह वही आत्मविश्वास था जो उन्होंने क्वार्टर फाइनल में मुंबई के खिलाफ 130 रन बनाकर दिखाया था।
तीसरे नंबर पर आए देवदत्त पडीक्कल ने भी अपनी भूमिका बखूबी निभाई। उन्होंने गेंदबाजों को थकाया, ढीली गेंदों को बाउंड्री तक पहुंचाया और रन गति को थमने नहीं दिया। 236 गेंदों पर 148 रन बनाकर वह नाबाद लौटे। उनकी पारी में 16 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। दूसरे छोर पर करुण नायर 37 रन बनाकर उनका साथ दे रहे थे।
कर्नाटक ने पहले दिन का खेल समाप्त होने तक दो विकेट पर 355 रन बना लिए। यह सिर्फ बड़ा स्कोर नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक बढ़त भी है। उत्तराखंड के गेंदबाजों को पूरे दिन विकेट के लिए तरसना पड़ा और लंबे स्पैल डालने पड़े।










