रणजी फाइनल : 584 का पहाड़ और 477 की बढ़त, कर्नाटक पर भारी पड़ा जम्मू-कश्मीर

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Credits : Espn Cricinfo

रणजी ट्रॉफी फाइनल में जम्मू-कश्मीर ने ऐसा दमदार प्रदर्शन किया है, जिसने मुकाबले को एकतरफा बना दिया है। विशाल पहली पारी, समझदारी भरा रणनीतिक फैसला और गेंदबाजों की सटीक मार—इन सबने मिलकर टीम को ऐतिहासिक खिताब के बेहद करीब ला खड़ा किया है।

चौथे दिन का खेल खत्म होने तक तस्वीर साफ नजर आने लगी है कि जम्मू-कश्मीर ने न सिर्फ स्कोरबोर्ड पर, बल्कि मानसिक तौर पर भी बढ़त बना ली है। पहली पारी में 584 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर टीम ने मैच की दिशा तय कर दी थी। जवाब में कर्नाटक की पूरी टीम 293 रन पर सिमट गई और 291 रन की बड़ी बढ़त हाथ से निकल गई।

इतनी भारी बढ़त के बावजूद जम्मू-कश्मीर ने फॉलोऑन न देने का फैसला किया। यह निर्णय उनके आत्मविश्वास और लंबी रणनीति का संकेत था। टीम ने दूसरी पारी में भी धैर्य और अनुशासन के साथ बल्लेबाजी जारी रखी।

चार विकेट के नुकसान पर 186 रन बनाकर कुल बढ़त 477 रन तक पहुंचा दी, जिससे कर्नाटक के सामने जीत के लिए लगभग असंभव सा लक्ष्य खड़ा हो गया।

सलामी बल्लेबाज कमरान इकबाल 94 रन बनाकर नाबाद लौटे, जबकि साहिल लोटरा 16 रन पर उनका साथ दे रहे हैं। दोनों ने यह साफ कर दिया कि टीम सिर्फ बढ़त को सुरक्षित रखने नहीं, बल्कि मुकाबले को पूरी तरह अपने कब्जे में लेने उतरी है।

कर्नाटक की ओर से मयंक अग्रवाल ने 160 रन की जुझारू पारी खेलकर संघर्ष जरूर किया, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। जम्मू-कश्मीर के गेंदबाजों ने सामूहिक प्रयास से दबाव बनाए रखा और नियमित अंतराल पर विकेट झटकते रहे।

इस मुकाबले के सबसे बड़े नायक उभरते तेज गेंदबाज आकिब नबी रहे। तीसरे दिन से ही उन्होंने अपनी गति और सटीक लाइन-लेंथ से कर्नाटक के बल्लेबाजी क्रम को परेशान किया।

23 ओवर में 54 रन देकर पांच विकेट लेने वाले नबी ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। उनका यह प्रदर्शन न केवल टीम की जीत की नींव बना, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी दावेदारी को भी मजबूत कर गया।

अब अंतिम दिन कर्नाटक के सामने चुनौती सिर्फ रन बनाने की नहीं, बल्कि इतिहास पलटने की है—जबकि जम्मू-कश्मीर खिताब से बस एक मजबूत कदम दूर खड़ा है।

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