-इन 6 खिलाड़ियों पर यूं ही लाखों खर्च कर देगा यूपीसीए! अंधा बांटे रेवड़ी…
बेबाक/संजीव मिश्र
” सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या हुआ। ” पहले चरण के 5 मैचों में सिर्फ एक जीत दर्ज कर पाने वाली यूपी रणजी टीम के चयनकर्ता अपने आंसू छिपाने के लिए फिर पुराने कप्तान के कंधे को देख रहे हैं। नॉक आउट में पहुंचने की बची-खुची संभावनाएं तलाशने के लिए उन्होंने बीच सीजन यूपी रणजी टीम का कप्तान बदल दिया है। खास बात तो यह कि चयनकर्ताओं ने पहले चरण में कप्तानी करने वाले करन शर्मा को 21 सदस्यों वाली जम्बो सूची में जगह तक नहीं दी है और न ही उनको टीम से बाहर करने का कोई कारण बताया है।
बीच सीजन टीम से बाहर हुआ कप्तान!
बता दें कि 22 जनवरी से लखनऊ के इकाना स्टेडियम में शुरू होने जा रहे रणजी ट्रॉफी के दूसरे चरण के लिए कप्तान करन शर्मा को टीम से निकाल उनकी जगह आर्यन जुयाल को नेतृत्व सौंपा है। जबर्दस्त फॉर्म में चल रहे आर्यन जुयाल ने पिछले सीजन भी यूपी की कप्तानी की थी। करन शर्मा पहले चरण में यूपी को सिर्फ एक जीत दिला पाए। यूपी टीम पहली पारी में बढ़त तो हासिल करती रही लेकिन नॉक आउट दौर के लिए सीधी जीत उसे सिर्फ नागालैंड जैसी कमजोर टीम के खिलाफ ही मिल सकी। करन शर्मा को संभवत: इसी का खामियाजा भुगतना पड़ा। दरअसल कप्तानी में असफलता के अलावा बल्लेबाजी में भी उड़ीसा के खिलाफ एक शतक ही उनका सबसे खास प्रदर्शन था। अब आते हैं अगले दो मैचों के लिए घोषित खिलाड़ियों के संख्या बल पर जो कि 21 है।
समीर रिज़वी, मोहसिन खान और आकिब खान टीम में नहीं
खिलाड़ियों की लम्बी सूची देखकर कह सकते हैं कि कुछ भी कर लीजिए लेकिन यूपी क्रिकेट का बीमार सिस्टम वेंटिलेटर से बाहर नहीं आने वाला। झारखंड और विदर्भ के खिलाफ लीग के अंतिम दो मुकाबलों के लिए यूपी ने खिलाड़ियों का बड़ा झुंड उतार दिया है। जब पहले चरण में आप कुछ नहीं कर पाए तो आखिरी दो मैचों में क्या उखाड़ लेंगे? वो भी तब जबकि आपके अंतरराष्ट्रीय स्टार टीम में नहीं हैं। आश्चर्यजनक यह है कि इतनी बड़ी सूची में भी समीर रिज़वी और आकिब खान जैसे खिलाड़ी नहीं हैं, जबकि मोहसिन खान की फिटनेस पर भी कोई अपडेट नहीं दिया गया है।
भुवनेश्वर कुमार कहां हैं और क्यों नहीं खेल रहे
भुवनेश्वर कुमार कहां हैं और क्यों नहीं खेल रहे हैं, किसी को नहीं पता। आराध्य यादव, रितुराज शर्मा, कृतज्ञ कुमार सिंह, सिद्धार्थ यादव, सात्विक चिंकारा के भी इस सीजन का पैक अप हो गया। दरअसल यही है पर्ची का असल खेल। सबको एक या दो बार 15 के स्क्वॉड में डालने के लिए मैजिक व्हील घूमता है। और फिर यहीं ऊपरी शक्ति का खेल शुरू होता है। जो 15 में आ गया उसे आईपीएल के लिए पात्रता प्रमाण पत्र मिल जाता है, बाकी क्या खेल होता है बताने की जरूरत नहीं। बाकी को सीजन के दौरान मौका देख एक-एक करके टीम में डाल दिया जाता है। जो रह गया उसे अगले सीजन या विजय हजारे और सैय्याद मुश्ताक अली ट्रॉफी में मौका देकर वादा पूरा कर दिया जाता है। अंधा बांटे रेवड़ी…। दरअसल आज के हर युवा खिलाड़ी का एक ही उद्देश्य रहता है कि बोर्ड ट्रॉफी में बस एक दो मैच मिल जाएं तो आईपीएल के लिए उसकी लाइन क्लीयर हो जाए। अभिभावक भी इसी लालच में अपने लाल के लिए घोड़े खोल देते हैं।
नेट बॉलर के रूप में ले जाते हैं तो महंगा है फैसला
मैच में सिर्फ 11 की टीम उतरती है, जबकि 4 बेंच पर होते हैं। अब बाकी 6 खिलाड़ियों का आप क्या करेंगे? यदि आप नेट बॉलर के रूप में इनकी सेवाएं ले रहे हैं तो यह काफी महंगा फैसला है। पूरी टीम लखनऊ के जिस होटल हयात रीजेंसी में रुकती है, उसके एक कमरे का टैरिफ 6 से 9 हजार रुपए प्रति दिन का है। 6 खिलाड़ियों के लिए यदि 3 कमरे भी लिए जाते हैं और उन्हें 6 हजार के सबसे कम किराए वाले रूम में भी रुकवाया जाता है तो यूपीसीए को 7 दिनों में 1.26 लाख सिर्फ रूम का किराया ही देना होगा। इसके अलावा टीम के कपड़े, कन्वेंस और फूड पर भी अच्छा खासा खर्च आएगा। इस खर्च के बदले इन खिलाड़ियों से यूपी टीम को क्या फायदा होगा? शायद कुछ नहीं, क्योंकि नेट्स के लिए आप यूपी में खेलें या बाहर, डिमांड पर टैलेंटेड लोकल बॉलर्स उपलब्ध करवा दिए जाते हैं, बाकी टीम के रेगुलर गेंदबाज भी रहते हैं। बता दें कि बीसीसीआई एक मैच के 15 खिलाड़ियों का ही खर्च उठाता है, बाकी खिलाड़ियों का खर्च उनकी स्टेट एसोसिएशन को ही देना होता है।
15 के बाद जुगाड़ वाले खिलाड़ियों को जगह
अमूमन 15 की सूची के बाद वे ही खिलाड़ी होते हैं जिन्हें विशेष रूप से ओब्लाइज किया जाता है। खुले शब्दों में कहा जाए तो इनका सीजन के लिए कोटा फिक्स होता है। सरलता से समझाएं तो यदि किसी खिलाड़ी को सीजन में एक या दो मैच खिलवाने हैं तो वह 16वें नंबर पर हो या 21वें पर, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि उसने ऊपरी शक्ति की अच्छी भक्ति की है तो उसका खेलना तय है। यकीन न हो तो यूपीसीए की मौजूदा सूची ही देख लीजिए। जिनका कोटा पूरा हो चुका है वे सूची में नीचे पड़े हैं। 4 साल दो महीने पहले सैय्यद मुश्ताक अली ट्रॉफी के तीन मैचों में 15, 0, 9 रनों की पारी खेलने वाले एक यूपीसीए पदाधिकारी सूची फाइनल होते-होते अपने पुत्र को जुड़वाने में सफल हो गए। मजेदार बात यह कि सूची बनाने में मददगार ऊपरी शक्ति ने ही “इक्कीस” का भांडा भी फुड़वा दिया।
पहले रणजी टीम में जगह बना पाना कठिन होता था
एक समय था जब रणजी टीम में एक दो खिलाड़ियों को बदलने के लिए भी चयनकर्ताओं को काफी माथापच्ची करनी पड़ती थी, क्योंकि टैलेंट ही इतना था कि नये खिलाड़ी को रणजी खेलने के लिए बेहद कड़ी प्रतिस्पर्धा से गुजरना पड़ता था। लेकिन पिछले 5-7 सालों में टैलेंट को खुद चयनकर्ता ही नहीं टिकने देते। उन्होंने तो खिलाड़ियों को एस्केलेटर पर खड़ा कर दिया है जिसे पता है कि उसको कब जमीन पर आना है।
खिलाड़ियों को मिलते थे लगातार मौके
मोहम्मद कैफ, सुरेश रैना, आरपी सिंह और यदि उससे भी पहले की बात करें तो गोपाल शर्मा, ज्ञानेन्द्र पांडेय जैसे क्रिकेटर कड़ी मेहनत करके रणजी तक पहुंच पाए। इनकों लगातार मैच भी भी मिलते थे। अब एक दो अपवाद छोड़ दें तो कोई खिलाड़ी अपनी स्थाई जगह नहीं असल में जुगाड़ संस्कृति के पनपते ही करोड़पतियों और क्रिकेट पदाधिकारियों की औलादों ने टैलेंट को पीछे ढकेलना शुरू कर दिया था। कभी कभार कुलदीप यादव और रिंकू सिंह जैसे आउटस्टैंडिंग टैलेंट को जगह देना मजबूरी बन जाता है। लेकिन फिर ऐसे ही खिलाड़ी को फेस बनाकर क्रिकेट के कुछ चालाक तथाकथित दलाल अपनी दुकानें और अच्छे ढंग से चमकाने लगते हैं।
5 मैचों में 56 खिलाड़ियों ने टीम में जगह बनाई!
अब देखिए टॉप फोर टीमों में विदर्भ ने पिछले 5 मैचों तक 50, आन्ध्र प्रदेश ने 34, झारखंड ने 44 जबकि यूपी ने सबसे ज्यादा 56 खिलाड़ियों की सूची जारी की है। छठे मैच में यूपी की नई सूची से कुछ और खिलाड़ियों के नाम जुड़ जाएंगे। यहां गौरतलब यह है कि सबसे ज्यादा खिलाड़ी उतारने के बावजूद यूपी की टीम 5 मैचों से 17 अंक जुटाकर ग्रुप बी की अंक तालिका में चौथे स्थान पर है और अब उसके नॉक आउट दौर में पहुंचने की संभावनाएं काफी कमजोर हैं। पहले के समय में 20-22 खिलाड़ी पूरा सीजन खेलते थे और टीम आराम से नॉक आउट दौर में पहुंच जाती थी।










