बेबाक/संजीव मिश्र
फॉर्म पर छाये घने कोहरे के बावजूद भारतीय कप्तान का सूर्य अभी भी चमक रहा है। दूसरी ओर आउट ऑफ फॉर्म उपकप्तान शुभमन गिल को टी-20 वर्ल्ड कप 2026 की टीम से बाहर करके चीफ सलेक्टर ने खुद पर लगे दाग धोने की कोशिश जरूर की लेकिन टीम की सभी कमजोर कड़ियों को काटने की हिम्मत वे फिर भी नहीं जुटा पाए। चीफ सलेक्टर अजित अगरकर यदि टी-20 टीम घोषित करने से पहले सूर्यकुमार यादव पर भी कोई मुरव्वत न करते तो कप्तान को ही हटाने का फैसला क्रिकेट खेलने वाले सभी देशों के लिए एक नजीर बनता। यही नहीं वे तो हेड कोच गौतम गंभीर के लाडले माने जाने वाले गेंदबाज हर्षित राणा को हटाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाए।
दो खिलाड़ियों पर चीफ सलेक्टर और हेड कोच का छाता
मौजूदा चैम्पियन टीम इंडिया के पास वर्ल्ड कप बरकरार रखने के लिए सलेक्शन कमेटी को टीम के एक-एक सदस्य की स्क्रीनिंग करनी चाहिए थी लेकिन कम से कम दो खिलाड़ियों पर चीफ सलेक्टर और हेड कोच का छाता साफ तना नजर आया। हाल ही में शुभमन गिल को जब 5 टी-20 मैचों की सीरीज के लिए उपकप्तान बनाया गया था, तब इस फैसले को निकट भविष्य में उन्हें क्रिकेट के इस सबसे छोटे फॉर्मेट की कप्तानी से भी नवाजने की तैयारी के रूप में देखा गया था। आश्चर्यजनक यह है कि जिसे भविष्य में तीनों फॉर्मेट का कप्तान बताया जा रहा था, उसे 4 ही मैचों के बाद टी-20 वर्ल्ड कप टीम में रखने लायक तक नहीं समझा गया। यानि तब आप गलत थे और मनमानी पर उतारू थे लेकिन जब बीसीसीआई ने आंख दिखाई तो चुपचाप शुभमन गिल की कुर्बानी दे दी।
टीम में शुभमन गिल की जगह तो बिल्कुल नहीं बनती थी
फॉर्म देखते हुए यह फैसला ठीक भी था। संजू सैमसन तीन शतक लगाने के बावजूद बाहर बैठे थे, जबकि गिल आउट ऑफ फॉर्म होने पर भी बतौर उप कप्तान टीम में बने हुए थे। पावर प्ले में उनका स्ट्राइक रेट भी कुछ समय से काफी खराब चल रहा था। उनकी मौजूदगी टीम को अच्छी शुरुआत नहीं दिला पा रही थी और टीम का संतुलन भी बिगाड़ रही थी। वर्ल्ड कप के लिए मजबूत टीम बनाने के लिए टीम इंडिया में ऑपरेशन जरूरी था। लेकिन एक काबिल सर्जन की तरह टीम की हर कमजोरी को खत्म करने के लिए जरूरी हिम्मत नहीं दिखाई गई।
क्या विनिंग कप्तान होने का फायदा मिला ‘स्काई’ को
पहले ही तय हो चुका था कि सूर्यकुमार ही टीम की कप्तान होंगे और प्रेस कांफे्रंस में टीम एनाउंसमेंट के समय बीसीसीआई सचिव व चीफ सलेक्टर के साथ होंगे। लेकिन ऐसा क्यों हुआ, किसकी मेहरबानी से फॉर्म पर कुहासा छाने के बावजूद सूर्यकुमार पर कोई असर नहीं पड़ा? उपकप्तान गिल की तरह इस टीम के बाकी कमजोर खिलाड़ी क्यों नहीं हटाए गए? क्या आउट ऑफ फॉर्म ‘स्काई’ को विनिंग कप्तान होने का फायदा मिला? दुर्भाग्य है रितुराज गायकवाड़ और रियान पराग जैसे बल्लेबाज इंतजार ही करते रह गए। उधर हर्षित राणा पर एक बार फिर ‘गुरु’ की कृपा बरस गई और हर फॉर्मेट में खुद को साबित कर चुके मोहम्मद सिराज जैसे काबिल गेंदबाज को इस टीम में जगह ही नहीं मिल पाई।
टीम के हित में सूर्यकुमार का जमीर क्यों नहीं जागा
बेहतर होता कि सूर्यकुमार ही इस महत्वपूर्ण टूर्नामेंट से खुद को अलग कर लेते। लेकिन ऐसे उदाहरण अपने देश में कम ही मिले हैं। रोहित शर्मा ने पिछले आस्ट्रेलियाई दौरे के एक टेस्ट से खुद फॉर्म खराब होने की वजह से टीम हित में बाहर बैठ गए थे। लेकिन सूर्यकुमार ऐसा उदाहरण नहीं पेश कर पाए, जबकि उनके बल्ले से बड़ा स्कोर निकले काफी समय हो गया है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हाल ही में संपन्न हुई टी-20 सीरीज में उनका योगदान 12, 5, 12, 5 यानि 4 मैचों में सिर्फ 34 रनों का ही रहा। उनको बतौर कप्तान लगातार जीत दिलाने की वजह से टीम से नहीं हटाया गया। लेकिन यह कैसा मजाक है कि बल्लेबाजी में टीम की सबसे कमजोर कड़ी होने के बावजूद कप्तान ही (यदि फॉर्म में नहीं लौटते हैं) टीम पर बोझ बना रहे?
श्रीलंका बोर्ड ने तो चरिथ असलंका को कप्तानी से हटा दिया
श्रीलंका बोर्ड ने चरिथ असलंका को टी-20 वर्ल्ड 2026 से केवल दो महीने पहले कप्तानी से हटा उनकी जगह दासुन शनाका को टीम की कमान सौंपने में जरा संकोच नहीं किया। हालांकि उनको हटाने का कारण अलग था। वे पाकिस्तान-श्रीलंका व जिम्बाब्वे के साथ ट्राई टूर्नामेंट को बीच में छोड़कर श्रीलंकाा लौट गए थे। यह भी सच है कि क्रिकेट इतिहास में ऐसे उदाहरण याद नहीं आ रहे, जब कोई टीम जीत रही हो और उसके कप्तान को आउट ऑफ फॉर्म होने की वजह से टीम से बाहर किया गया हो। लेकिन ऐसे उदाहरण जरूर हैं जब कुछ कप्तानों ने अपनी खराब फॉर्म के चलते टीम से खुद ही हटने का फैसला ले लिया, ताकि टीम बैलेंस बना रहे।
कुछ कप्तानों ने दी थी टीम हित को तरजीह
पाकिस्तान के कप्तान मिस्बाह-उल-हक ने 2014 यूएई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वन डे सीरीज में पहले दो मैचों में 0 और 15 के स्कोर किए और फिर उन्होंने टीम हित देखते हुए खुद को तीसरे मैच से बाहर कर लिया। इसी तरह श्रीलंका के कप्तान दिनेश चांदीमल (2014 टी-20 वर्ल्ड) ने सेमीफाइनल और फाइनल से खराब फॉर्म के कारण खुद को टीम से हटा लिया। इसके बाद उनकी जगह लसिथ मलिंगा कप्तान बने और श्रीलंका चैंपियन बना। इंग्लैंड के कप्तान माइक डेनिस (इंग्लैंड,1974 एशेज) तीसरे टेस्ट के बाद खराब फॉर्म से चौथे टेस्ट से बाहर हुए। ऐसे दुर्लभ निर्णय टीम के लंबे समय के हित में लिए जाते हैं, लेकिन ज्यादातर कप्तान खुद ऐसा कदम उठाते रहे हैं। यही अपेक्षा सूर्यकुमार से थी।
सूर्यकुमार का यह फेयरवेल वर्ल्ड कप?
संभव है कि कप्तान सूर्यकुमार यादव की खोई फॉर्म वर्ल्ड कप तक लौट आए लेकिन यह एक जुआ है। टीम का सलेक्शन मौजूदा फॉर्म को देखते हुए किया गया है और सच यही है कि फॉर्म को देखते हुए सूर्यकुमार और हर्षित राणा टीम में जगह बनाने के हकदार नहीं थे। यदि वर्ल्ड कप में भी सूर्यकुमार का बल्ला रूठा रहा तो 35 साल के हो चुके भारतीय कप्तान का यह फेयरवेल वर्ल्ड कप भी हो सकता है।










