बेबाक/संजीव मिश्र
टीम इंडिया इस बार विराट कोहली, रोहित शर्मा और रविचंद्रन अश्विन के बिना ही जब इंग्लैंड में पांच टेस्ट की लम्बी सीरीज खेलने पहुंची थी, तब उसकी क्षमताओं को संदेह की नजर से देखा जा रहा था। पहला टेस्ट लीड्स के हेडिंग्ले ग्राउंड पर होना था जो ग्रीन सीमर माना जाता है। यहां भारत 23 साल से नहीं जीत पाई रहा था। यहां टाॅस जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाजी की हिम्मत नहीं दिखा पाती है, ऐसा ही हुआ भी। इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने टाॅस जीतकर भारत को बल्लेबाजी में आजमाइश देने को कहा। भारतीय बल्लेबाजों ने भी इंग्लिश कंडीशन और उनके दर्शकों को अपनी प्रतिभा दिखाई। पहली पारी में तीन शतकों से बोर्ड पर 471 रन लगाकर यह बता दिया कि हमें हल्के में लेने की कतई गलती मत करना। यहां तक तो सब ठीक-ठाक था। लेकिन इसके बाद स्ट्रेटजी के मामले में टीम गच्चा खा गई और पहली पारी में 6 रन से मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने के बावजूद पहला टेस्ट पांच विकेट से गंवा बैठी।
पांच शतकों पर भारी पड़ गए दो शतक
इंग्लैंड टीम ने पहले टेस्ट की दो पारियों में लगाए सिर्फ दो शतक जो भारतीय टीम के पांच शतकों पर भारी पड़ गए! है ना कमाल की बात। दरअसल भारत के लिए पांच शतक चार बल्लेबाजों ने लगाए, जबकि इंग्लैंड की ओर से दोनों ही पारियों में पूरी टीम ने शानदार प्रदर्शन किया, जिसका उन्हें इनाम भी मिला और वे 371 रनों के अपने दूसरे सबसे बड़े लक्ष्य तक आसानी से पहुंच गए। भारतीय टीम ने पहली पारी में अपने मिडिल व लोअर ऑर्डर के 7 बल्लेबाज सिर्फ 41 रनों पर खो दिए थे, जबकि दूसरी पारी के अंतिम 6 बल्लेबाज भी सिर्फ 31 रन जोड़कर आउट हो गए। यदि हमारे इन बल्लेबाजों ने दोनों पारियों में कुल मिलाकर 150 रन भी और जोड़े होते तो भी क्या यही रिजल्ट होता? शायद नहीं।
क्षेत्ररक्षण में बेहद घटिया प्रदर्शन
दोनों पारियों में हवा में हो या जमीन, भारतीय क्षेत्ररक्षकों ने बेहद घटिया प्रदर्शन किया। इस मामले में तो टीम के फील्डिंग कोच से यह सवाल बनता है कि एक मैच में दस कैच छूटने पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है जनाब? और यह कि क्या आपको इस रिजल्ट के लिए मोटे पैसे दिए जा रहे हैं? भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड सपोर्टिंग स्टाफ पर जब भारी धनराशि खर्च कर रहा है तो उसे जबावदेह भी तो बनाना चाहिए। यदि इतने कैच न छोड़े गए होते तो भारत यह मैच आसानी से जीत गया होता। तीन-चार कैच तो यशस्वी जयसवाल से ही छूटे, जबकि वे शानदार क्षेत्र रक्षक माने जाते हैं।
हेड कोच ने तो पहले ही चेता दिया था
टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने मैच शुरू होने से पहले कहा था कि हम एक हजार रन बना लें लेकिन 20 विकेट न ले पाए तो कोई फायदा नहीं, क्योंकि हम मैच तब भी नहीं जीत पाएंगे। इंग्लैंड के खिलाफ लीड्स में खेले गए पहले टेस्ट में ऐसा ही हुआ। भारत ने आठ सौ से ज्यादा रन तो बनाए लेकिन 20 विकेट नहीं गिरा पाए। दूसरी ओर इंग्लैंड ने ऐसा कर दिखाया।
रवीन्द्र जडेजा को लम्बे स्पेल देने चाहिए थे
शुभमन गिल का बतौर पूर्णकालिक कप्तान यह पहला टेस्ट था, इसलिए उनकी कुछ गलतियां नजर अंदाज की जानी चाहिए। लेकिन यदि अगले मैचों में भी वे इन्हें दोहराते नजर आते हैं तो भारत की सीरीज में वापसी की राह कठिन हो जाएगी। खासकर उन्हें अंतिम एकादश का सही चयन न कर पाना और अपने गेंदबाजों का सही इस्तेमाल न कर पाने की गलती करना काफी महंगा पड़ सकता है। कुछ छोटी-छोटी गलतियां भारी पड़ गईं, मसलन रवीन्द्र जडेजा विकेट पर बने रफ का अच्छा इस्तेमाल कर सकते थे लेकिन शुभमन गिल ने उन पर भरोसा न दिखाकर शुरुआत में उनको छोटे स्पेल ही दिए गए, जबकि बुमराह के दूसरी पारी में फेल होने पर जडेजा ही एकमात्र मैच विनर गेंदबाज थे।
प्रसिद्ध कृष्णा से बेहतर विकल्प होते अर्शदीप सिंह
इस मैच में प्रसिद्ध कृष्णा ने भले ही दोनों पारियों में पांच विकेट लिए हों लेकिन उनकी गेंदों पर रन काफी आसानी से बने। इस मैच से यह भी साफ हो गया कि अर्शदीप सिंह उनसे बेहतर विकल्प साबित हो सकते थे। लेकिन कप्तान को अपनी आईपीएल टीम के साथी पर ज्यादा भरोसा था। इसी तरह नीतीश कुमार रेड्डी पर तरजीह पाने वाले शार्दूल ठाकुर भी पहले टेस्ट में खास प्रभाव नहीं छोड़ सके। दूसरी पारी में दो विकेट लेकर उन्होंने खुद को साबित करने का प्रयास जरूर किया लेकिन बतौर ऑलराउंडर वे अपने प्रदर्शन से प्रभावित करने में असफल रहे।
रूट और स्मिथ अपनी टीम को आसानी से जीत तक ले गए
रवीन्द्र जडेजा राउंड द विकेट रफ का शानदार इस्तेमाल कर रहे थे और बल्लेबाजों को लगातार परेशान भी कर रहे थे लेकिन बाद में वे ओवर द विकेट गेंदबाजी करने लगे, जिस पर वे बहुत प्रभावी भी नहीं दिखाई दिए। शुभमन गिल ने उनसे राउंड द विकेट गेंदबाजी करने को कहा भी लेकिन वे काफी देर बाद उनकी बात माने। इसका फर्क यह पड़ा कि रूट और स्मिथ अपनी टीम को आसानी से जीत तक ले गए।
गेंदबाजों का सही इस्तेमाल करने में असफल
शुभमन गिल का अपने सबसे खर्चीले गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा को उस समय अटैक पर लाने का फैसला भी गलत साबित हुआ जब इंग्लैंड को जीत के लिए सिर्फ 80 से कुछ ज्यादा रनों की जरूरत थी। अब तक जो रूट और बेन स्टोक्स गेंद पर नजरें जमा चुके थे। स्टोक्स ने उन पर आक्रामक रुख अपनाया जिससे मैच भारत के हाथ से निकलता चला गया।
करुण नायर का इस्तेमाल क्यों नहीं किया
एक बात और समझ में नहीं आई कि जब रेगुलर बाॅलर काम नहीं आ रहे थे तब कप्तान ने गेंदबाजी में अपने पार्ट टाइम ऑफ स्पिनर करुण नायर का इस्तेमाल करके क्यों नहीं देखा? बतौर चेंज बाॅलर उनको आजमाकर अंग्रेज बल्लेबाजों को चौंकाया जा सकता था। फर्स्ट क्लास, लिस्ट ए व डोमेस्टिक टी-20 में करुण नायर 36 विकेट ले चुके हैं। ऐसे गेंदबाज अक्सर बड़ी पार्टनरशिप तोड़ देते हैं। जैक क्राॅउली और बेन डकेट की साझेदारी को तोड़ने के लिए कप्तान को यह प्रयोग भी करना चाहिए था। एक कप्तान फंसे हुए मैच को जीतने के लिए अपने तरकश में मौजूद हर तीर का इस्तेमाल करता है, कह सकते हैं कि शुभमन गिल को अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।










