– फिर भी काफी कुछ हासिल करके लौट रही है भारतीय टीम इस लम्बे दौरे से
बेबाक/संजीव मिश्र
इंग्लैंड में बमुश्किल इज्जत बची यह किसी से छिपा नहीं है। अंतिम टेस्ट ने भले ही हेड कोच गौतम गंभीर और नवोदित कप्तान शुभमन गिल को तीखे सवालों के बाउंसर से बचा लिया हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि लम्बी सीरीज में की गई गल्तियों का पोस्टमार्टम नहीं होना चाहिए। यह दौरा भारतीय क्रिकेट में कुछ सुधार करने के लिए संकेत दे गया है। सही मायने में देखें तो इस सीरीज में भारतीय बल्लेबाजी शुभमन गिल, यशस्वी जयसवाल, केएल राहुल, रिषभ पंत और रवीन्द्र जडेजा के ही कंधों पर निर्भर रही, जबकि गेंदबाजी में हम कभी जसप्रीत बुमराह तो कभी मोहम्मद सिराज की ओर देखते रहे। आकाश दीप और प्रसिद्ध कृष्णा का प्रदर्शन तो आसमान में कभी कभार चमकी बिजली जैसा रहा। इस सीरीज में स्पिनरों का तो रोल ही किसी फिल्म में आईटम गर्ल्स जैसा रहा। साफ नजर आया कि कोच और कप्तान शुरू से ही पेस अटैक पर 95 फीसदी लोड रखने की योजना के साथ इंग्लैंड गए थे। चलिए पहले इस सीरीज में की गईं गल्तियों पर नजर डालते हैं-
बड़ी गल्तियां
– चयनकर्ताओं ने बड़े दौरे पर बल्लेबाज सरफराज खान की अनदेखी की
– प्लेइंग इलेवन के चयन में बार-बार गलत फैसले लिए गए
-कुलदीप यादव, अभिमन्यु ईश्वरन और अर्शदीप सिंह का इस्तेमाल ही नहीं किया गया
– महत्वपूर्ण ओवल टेस्ट में जसप्रीत बुमराह को खेलने के लिए कहना चाहिए था जो नहीं किया गया
– वर्कलोड मैनेजमेंट का लाभ सिर्फ बुमराह को ही दिया गया, जबकि सिराज ने सभी टेस्ट खेले और सबसे ज्यादा गेंदबाजी की
– प्रसिद्ध कृष्णा को तो बार-बार आजमाया गया पर अर्शदीप सिंह को एक भी मौका नहीं दिया गया
– रवीन्द्र जडेजा और वाशिंगटन सुंदर से पर्याप्त गेंदबाजी ही नहीं करवाई गई, जबकि वे बतौर ऑलराउंडर टीम में चुने गए थे
– करुण नायर और साईं सुदर्शन के न चलने के बावजूद अभिमन्यु ईश्वरन को मौका नहीं दिया गया
इन तीनों खिलाड़ियों की क्या गलती थी
पांचवें टेस्ट में जब भारत की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी, तब भी बुमराह को आराम देकर टीम पर और संकट पैदा कर दिया गया। प्रसिद्ध कृष्णा को फेल होने के बाद भी मौके पर मौके मिलते गए लेकिन अर्शदीप सिंह का डेब्यू तक नहीं कराया गया। अभिमन्यु ईश्वरन आस्ट्रेलिया दौरे के बाद इंग्लैंड में भी टेस्ट कैप नहीं पहन सके, इस बल्लेबाज को लेकर कोच और कप्तान सशंकित थे तो इंग्लैंड लेकर ही क्यों गए? कुलदीप यादव के बारे में तो क्या ही कहिएगा, वर्ल्ड क्लास स्पिनर होने के बावजूद पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में उन्हें बेंच पर ही बैठाए रखा गया। ये तीनों खिलाड़ी इंग्लैंड घूम कर लौट रहे हैं। एक अन्य खिलाड़ी नारायण जगदीशन जिसे रिषभ पंत के रिप्लेसमेंट के तौर पर अचानक इंग्लैंड बुलाया गया था, वह भी बिना खेले लौट रहा है। इसे बुलाने की तुक ही समझ में नहीं आई।
प्लेइंग इलेवन के चयन में बार-बार चूक हुई
अंतिम टेस्ट शुरू होने से पहले भारत इस सीरीज में इंग्लैंड से 1-2 से पीछे था। हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल जानते थे कि यह टेस्ट न जीते तो सीरीज भी हाथ से निकल जाएगी। लेकिन 11 खिलाड़ियों का चयन करने में इंग्लैंड में आखिरी बार भी सही फैसले नहीं लिए गए। अंतिम एकादश में एक बार फिर बल्लेबाजी को मजबूत करने पर ही सारा ध्यान लगा दिया गया। हालांकि इंग्लैंड ने फ्रंट लाइन गेंदबाज न होने के बावजूद पहले दिन भारत की आधी टीम सिर्फ 123 रनों पर पवेलियन भेज दी थी।
मैच विनर गेंदबाज कुलदीप यादव को क्यों बाहर रखा गया
इंग्लैंड ने एक दिन पहले ही अपनी टीम घोषित कर दी थी। टीम मैनेजमेंट और कप्तान जानते थे कि इंग्लैंड के मुख्य गेंदबाज भले ही बाहर हों लेकिन उसकी बल्लेबाजी में गहराई 10 नंबर तक है। दूसरी ओर जसप्रीत बुमराह इस मैच में नहीं खेलेंगे, यह जानते हुए भी मैच विनर गेंदबाज कुलदीप यादव को फिर बाहर रखा गया, जबकि भारत ने चौथे टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में चार बदलाव किए थे। कुलदीप ही क्यों अभिमन्यु ईश्वरन और अर्शदीप सिंह भी इस लम्बी सीरीज में बगैर एक भी टेस्ट मैच खेले भारत लौट रहे हैं। अंशुल कम्बोज ऐसे भाग्यशाली गेंदबाज रहे जिनको सीरीज के बीच में टीम में शामिल हो टेस्ट कैप पहनने का मौका भी मिल गया।
अंशुल कंबोज को एक मैच के लिए बुलाने की क्या जरूरत थी
एक अहम सवाल यह भी उठता है कि अंशुल कंबोज को सिर्फ एक मैच के लिए भारत से बुलाने की क्या जरूरत थी? बुलाया ही था तो कम से कम दो मैच देकर उसके साथ न्याय तो किया जाता। हरियाणा के अंशुल कंबोज को अर्शदीप सिंह और आकाश दीप के घायल होने पर ओल्ड ट्रैफर्ड टेस्ट में बुलाया गया था। लेकिन अंतिम टेस्ट में कंबोज की जगह प्रसिद्ध कृष्णा को जगह दी गई जो शुरुआती मैचों में इंग्लिश बल्लेबाजों से जमकर मार खाए थे। गनीमत रही कि इस मैच में उनको कामयाबी मिल गई लेकिन उनका इस दौरे का पिछला रिकॉर्ड कतई ऐसा नहीं था जो सीरीज के सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट में उनको जगह दिलवाने की पैरवी करता हो। कह सकते हैं कि गंभीर और गिल का यह एक ऐसा जुआ था जो इत्तेफाक से कामयाब रहा।
नारायण जगदीशन को क्यों बुलाया गया?
विकेट कीपर रिषभ पंत के घायल होने पर उनके बैकअप के लिए तमिलनाडु के नारायण जगदीशन को टीम में पर्याप्त विकल्प होने के बावजूद शामिल करना किस रणनीति का हिस्सा रहा, इसका जवाब तो सलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट के पास ही होगा लेकिन सभी जानते हैं कि ध्रुव जुरेल और केएल राहुल के रूप में वैकल्पिक विकेट कीपर भारत के पास पहले से मौजूद थे। यदि भारत यह सीरीज गंवा देता तो खराब प्लेइंग इलेवन चुनने पर हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल को सवालों से घेर लिया जाता। शुभमन गिल तो पहली सीरीज होने की वजह से बच भी जाते लेकिन गंभीर न बच पाते, क्योंकि अब बतौर कोच चार टेस्ट सीरीज का अनुभव उनके पास है।
गिल ने अपनी कप्तानी की खामियां बल्ले से छिपा लीं
शुभमन गिल की कप्तानी की कमियों को उनके 750 से ज्यादा रनों ने कवर कर दिया। हालांकि उनसे कप्तानी में खूब चूक हुई। फील्ड सेटिंग हो या गेंदबाजी में बदलाव, शुभमन कई फैसलों पर कमजोर नजर आए। कमाल की बात यह रही कि आप कुलदीप यादव जैसे वर्ल्ड क्लास स्पिनर के न होने के बावजूद रवीन्द्र जडेजा और वाशिंगटन सुंदर को बतौर ऑलराउंडर खिलाते हैं लेकिन दोनों गेंदबाजों से अंतिम टेस्ट में कुल मिलाकर 10 ओवर गेंदबाजी ही करवाते हैं। दूसरी पारी में जब हैरी ब्रुक और जो रूट की साझेदारी भारत को हार के मुहाने तक ले जा रही थी तब भी आप अपने इन दो स्पिनरों की जगह लगातार पिट रहे पेसर्स को ही लगाए रहे। इन परिस्थितियों में तो कोई भी नौसिखिया कप्तान खतरनाक बन चुकी साझेदारी को तोड़ने के लिए अपने स्पिनरों को मौर्चे पर लगाता। लेकिन गिल ने ऐसा नहीं किया।
वर्कलोड मैनेजमेंट का लाभ सिर्फ बुमराह को क्यों?
एक बात और वर्कलोड मैनेजमेंट का लाभ पाने के हकदार क्या सिर्फ बुमराह ही हैं? सिराज ने सभी पांच टेस्ट मैच खेले और अंतिम टेस्ट तक उनका उत्साह देखने लायक था। क्या बुमराह को खुद आगे बढ़कर यह नहीं कहना चाहिए था कि मैं यह टेस्ट खेलूंगा, क्योंकि भारत को अंतिम टेस्ट में मेरी जरूरत है? दूसरी ओर बेन स्टोक्स पूरी तरह फिट न होने के बावजूद चार टेस्ट मैचों में लम्बे-लम्बे स्पेल करते रहे। रिषभ पंत और क्रिस वोक्स फ्रैक्चर के बावजूद टीम की जरूरत को देखते हुए मैदान में उतरे।
बुमराह सम्मान पाने का यह मौका खो चुके
आप बड़े खिलाड़ी हों या छोटे लेकिन जब देश और टीम को आपकी सबसे ज्यादा जरूरत हो यदि उस समय आप किन्हीं भी परिस्थितियों में मैदान में उतरते हैं तभी सम्मान के हकदार होते हैं। दुर्भाग्य से कद्दावर गेंदबाज होने के बावजूद बुमराह यह मौका खो चुके हैं। सिराज ने दिखा दिया है कि वे गेंदबाजों को लीड करने और खुद के प्रदर्शन से टीम को किन्हीं भी हालत से उबारने में सक्षम हैं। वर्कलोड मैनेजमेंट के बारे में बीसीसीआई को फिर से समीक्षा करनी होगी। यदि आप बहुत बड़े खिलाड़ी हैं लेकिन समय पर टीम के काम नहीं आते तो बोर्ड को सिराज, आकाशदीप, अर्शदीप जैसे खिलाड़ियों पर ज्यादा फोकस करना चाहिए।
इस सीरीज से कुछ अच्छा भी हासिल हुआ
ऐसा नहीं कि यह पूरी सीरीज ही भारत के लिए गल्तियों का गुच्छा रही हो, हमारी टीम ने काफी कुछ हासिल भी किया है। इस दौरे की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि हमारी टीम अब एक लड़ाकू टीम बनकर उभर रही है, जो कैसी भी विपरीत परिस्थितियां हों पलटवार कर मैच में वापसी करती है। ऐसा कभी आस्ट्रेलियाई टीम में देखा जाता था। सीरीज का परिणाम भले ही 2-2 रहा हो लेकिन भारतीय टीम इस सीरीज को 3-1 से जीतने की हकदार थी। लॉर्ड्स टेस्ट में यदि रवीन्द्र जडेजा को निचले क्रम के बल्लेबाजों का थोड़ी देर और साथ मिला होता तो भारत इस टेस्ट को जीत गया होता।
नया हीरो : सिराज एक फाइटर लीडर गेंदबाज के रूप में उभरे
भारत को इस सीरीज ने मोहम्मद सिराज के रूप में फाइटर लीडर गेंदबाज से रूबरू करवाया है। बुमराह की छाया में सिराज की लीडरशिप वाली जो काबिलियत अभी तक छिपी हुई थी, पहली बार इंग्लैंड में उभर कर सामने आई है। तनाव के लम्हों में भी सिराज ने संयम रखा और प्रसिद्ध कृष्णा से भी नियंत्रित गेंदबाजी करवाई। दर्शकों से भी सपोर्ट लिया। वे अलग ही नजर आए। एक खास बात यह भी रही कि भारत की इस टीम में इंग्लैंड की परिस्थितियों में खुद को जल्दी ढालने और मेजबान टीम की आंख में आंख डालकर देखने की क्षमता नजर आई। पिछले दौरों में आधी सीरीज तो हमारे खिलाड़ियों को इंग्लिश वेदर से तालमेल बैठाने में ही निकल जाती थी। लेकिन इस बार दूसरे ही टेस्ट में हमने बड़ी जीत हासिल कर अंग्रेजों को बता दिया कि यह नयी भारतीय टीम है। भारतीय खिलाड़ियों ने इंग्लैंड के खिलाड़ियों की स्लेजिंग का जवाब भी दबंगई के साथ दिया। साफ नजर आया कि हेड कोच गौतम गंभीर की इस टीम के तेवर काफी तीखे हैं।










