खेल निदेशालय के सबसे काबिल क्रिकेट कोच लक्ष्य राज त्यागी रिटायर

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– हॉस्टल के खिलाड़ियों को रणजी टीम में मौका न देने पर एक सलेक्टर के लिए ग्रीनपार्क के गेट बंद करवा दिए थे

– उनके सिखाए ग्रीनपार्क हॉस्टल के पूर्व छात्रों ने दी अपने गुरु को सरप्राइज पार्टी

कानपुर/संजीव मिश्र

लम्बे सेवाकाल के बाद मिलने वाले फेयरवेल में आपके सहयोगी और आपसे सीखने वाले छात्र आपको किस तरह याद करते हैं, दरअसल आपके कार्य की असली समीक्षा तब ही होती है। क्रिकेटरों के द्रोणाचार्य लक्ष्य राज त्यागी के रिटायरमेंट में उनके वे छात्र जिनको हॉस्टल छोड़े 30-32 साल हो चुके थे, भी अपने गुरु को अनोखे अंदाज में सरप्राइज देने राज्य भर से एकत्र हुए। वे अपने पहले कोच को नहीं भूले तो इसकी मुख्य वजह यही थी कि उनके गुरु ही प्रेरणा स्रोत और असली हीरो रहे। उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय के लोकप्रिय क्रिकेट कोच लक्ष्यराज त्यागी ने 30 जून को अटेंडेंस रजिस्टर पर अंतिम बार हस्ताक्षर किया। पूरा दिन कार्य करने के बाद वे रिटायर हो गए, स्टाफ और उनके पूर्व छात्रों ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी। सोमवार को उनके फेयरवेल पर कई लोग भावुक हुए। कोच की आंखें भी नम हुईं। यादों की बारातें निकलीं और फिर यह दिन इस लोकप्रिय कोच के लिए एक सुनहरा इतिहास छोड़ कर तारीख बन गया। उनकी अंतिम पोस्टिंग गौतमबुद्ध नगर में थी। अपने कार्यकाल के दौरान वे कानपुर, मेरठ, बिजनौर और मुजफ्फर नगर में भी रहे।

कुछ ही क्रिकेट कोच या अफसर याद किए जाते हैं

खेल विभाग में बहुत से क्रिकेट कोच व खेल अधिकारी आए और चले गए। लेकिन याद कम को ही किया जाता है। बेशक उनमें से कई ऐसे भी थे जिनको आज भी उनके छात्र याद करते हैं। क्रिकेट का कर्ज चुकाने वालों में आनंद शुक्ला, जीआर गोयल, रोहित चतुर्वेदी, नीरू कपूर, संजीव पंत, पी.के. गुप्ता, नवीन त्यागी और लक्ष्यराज त्यागी को हमेशा याद किया जाएगा। परमानेंट टेस्ट सेंटर वाले उत्तर प्रदेश में अब अच्छे क्रिकेट कोच की कमी शिद्दत से महसूस होगी। लक्ष्य राज त्यागी के रिटायर होने के बाद खेल विभाग में कुछ ही क्रिकेट कोच बचे हैं।

अपने शिष्यों का यह सरप्राइज कोच के दिल में उतर गया

कोच लक्ष्य राज त्यागी ने ‘स्पोर्ट्स लीक’ को बताया कि एक दिन पहले ग्रीनपार्क हॉस्टल के उनके पूर्व छात्र संजीव जखमोला का फोन आया। उसने कहा कि सर यहां अपने परिवार के साथ आया हुआ हूं और आपके साथ खाना खाए बिना नहीं जाऊंगा। ग्रेटर नोएडा में एक रेस्टोरेंट में मिलने की बात तय हुई। जब वे पहुंचे तो संजीव जखमोला उन्हें मिले। जब उनसे पूछा कि परिवार कहा है तो पीछे से ग्रीनपार्क हॉस्टल के मनोज मुद्गल, समीर कानूनगो, देवदत्त तिवारी, नजर खान, विजय राय, अश्वनी कुमार, अहमदुल्ला और उपेन्द्र दत्ता समेत कई पूर्व छात्र निकल आए। यह देख मैं आश्चर्य चकित रह गया और मन खुशी से भर उठा।

अपने खिलाड़ियों के लिए लड़ने वाला कोच

लक्ष्यराज वही कोच हैं जिनके हॉस्टल से जब एक भी खिलाड़ी का यूपी की टीम में चयन नहीं हुआ तो उन्होंने कानपुर के रहने वाले एक सलेक्टर के लिए ग्रीनपार्क स्टेडियम के गेट के अंदर घुसने पर रोक लगा दी थी। उनका कहना था कि जब आपको रोज नेट्स पर खिलाड़ियों को देखने के बावजूद ग्रीनपार्क हॉस्टल के हास्टल के खिलाड़ियों का टैलेंट दिखाई नहीं देता तो फिर आपको उस स्टेडियम में घुसने का भी हक नहीं। ऐसा सख्त कदम वह कोच ही उठा सकता है, जिसे अपने छात्रों की प्रतिभा पर शत प्रतिशत भरोसा हो। लक्ष्य राज ने इसे साबित भी किया।

यूपी अंडर-19 चैम्पियन थी तब भी रणजी में किसी को नहीं लिया

वे उस घटना को याद करते हुए कहते हैं कि दरअसल रणजी टीम का चयन था और हमारे लड़के ज्ञानेन्द्र पांडेय की कप्तानी में अंडर-19 फाइनल में अभिजीत काले की मुंबई टीम को हराकर चैम्पियन बने थे। मुंबई की उस टीम में संजय बांगड़ और जतिन परांजपे जैसे खिलाड़ी भी थे। इसके अलावा हमने कर्नाटक की उस टीम से सेमीफाइनल जीता था जिसमें राहुल द्रविड़ और सोमसुंदरम जैसे खिलाड़ी थे। इसके बावजूद हमारे एक भी खिलाड़ी को रणजी टीम में जगह नहीं दी गई तो मुझे काफी आश्चर्य भी हुआ और गुस्सा भी आया। ऐसा तब हुआ था जबकि एक सलेक्टर रोज ग्रीनपार्क आता था और बच्चों के खेल की तारीफ करता था।

लक्ष्य राज त्यागी ने दिए एक से बढ़कर एक खिलाड़ी

लक्ष्य राज 1988 से 95 तक कानपुर में रहे। उनसे सीख कर ज्ञानेन्द्र पांडेय, मोहम्मद कैफ, ज्योति यादव जैसे खिलाड़ियों ने टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा रीता डे, मनोज मुद्गल, रामबाबू पाल, अरविन्द कपूर, सतीश केसरवानी, संजीव जखमोला, पीयूष पांडेय, ब्रजेन्द्र यादव, देवदत्त तिवारी व कई अन्य खिलाड़ियों ने उनसे क्रिकेट सीखकर लम्बे समय तक अपने राज्य के लिए शानदार क्रिकेट खेला। ये खिलाड़ी भी उनको दिल से प्यार करते हैं और अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं।

पहली ही पोस्टिंग में खुद का साबित कर दिया था

कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। लक्ष्यराज त्यागी को पहली पोस्टिंग ही 1988 में ग्रीनपार्क हॉस्टल में मिली थी। उन्होंने खुद को साबित करते हुए जबर्दस्त टैलेंट निकाल यूपी क्रिकेट के रहनुमाओं को बता दिया कि उन्हें युवा खिलाड़ियों को ग्रूम करना बखूबी आता है। हालांकि खेल निदेशालय इस कोच के हुनर का ठीक से लाभ नहीं उठा सका। इसके बाद उनको कई ऐसे जिलों में भेजा गया जहां उन्हें क्रिकेट सिखाने के मूल कार्य से इतर अन्य कायार्ें में ज्यादा उलझना पड़ा। क्रिकेट के मुख्य सेंटरों पर जो क्रिकेट कोच भेजे गए वे लक्ष्यराज त्यागी के कार्य का 10 प्रतिशत भी नहीं दे सके।

बिजनौर में मेघना सिंह को बनाया इंटरनेशनल क्रिकेटर

बिजनौर के अपने कार्यकाल के दौरान लक्ष्य राज त्यागी ने मेघना सिंह को प्रशिक्षित कर टीम इंडिया तक पहुंचाया। मीडियम पेसर मेघना सिंह चार साल इंडिया खेलीं और फिर विमन प्रीमियर लीग में गुजरात टाइटंस के लिए दो साल खेलीं। कोच बताते हैं कि मेघना जब उनके पास आई तो स्पिन गेंदबाजी करती थी लेकिन मुझे लगा कि यह मीडियम पेसर बन सकती है। आउट स्विंग पर काम करवाकर उसे आगे बढ़ाने का प्रयास किया, जिसमें कामयाबी भी मिली।

‘जुगाड़ पर नहीं, अपनी मेहनत पर भरोसा करें’

सोमवार को जब कोच लक्ष्यराज त्यागी के कार्यकाल का अंतिम दिन था, तब अपने गुरु को फेयरवेल देने पूरे प्रदेश से उनके कई शिष्य पहुंचे। क्रिकेट कोच के उन साथियों और कुछ शिष्यों ने जो नोएडा नहीं पहुंच सकते थे उनके साथ बीते यादगार लम्हों को वीडियो कमेंट्स के गुलदस्ते के रूप में उन तक पहुंचाकर साझा किया। यह तय है कि लक्ष्यराज त्यागी के रिटायरमेंट से खेल निदेशालय में काबिल क्रिकेट कोचों की रिक्तता महसूस होगी। लक्ष्य राज त्यागी ने युवा खिलाड़ियों को सुझाव दिया है कि वे कड़ी मेहनत कर अपने खेल को निखारें, जुगाड़ से टीम में जगह बनाने या दूसरा कोई शॉर्ट कट अपनाने की तरफ तो सोचें भी नहीं।

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