आईपीएल के 18वें सीजन में मिली पहली जीत के बाद रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु के बुधवार को मनाए गए जश्न के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि इस दौरान हुए हादसे में 11 फैन्स की मौत हो गई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे। कोर्ट ने भीड़ प्रबंधन की नीति और आपात योजना पर सवाल उठाए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 10 जून को होगी।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने सिद्धारमैया सरकार से सख्त सवाल पूछे हैं।
बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार को चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ की घटना पर एक स्टेटस रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया। कर्नाटक हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव की अगुआई वाली डिवीजन बेंच ने इस घटना का खुद संज्ञान लिया। भगदड़ पर सरकार ने कोर्ट को बताया कि 2.5 लाख लोगों की भीड़ जमा थी और कुल 1483 पुलिसकर्मियों की तैनाती थी।
इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह हुआ-
हाईकोर्ट: “अगर भविष्य में ऐसी कोई घटना होती है, तो क्या आपके पास कोई तय योजना है?”
एडवोकेट जनरल : “यह भविष्य की बात है।”
हाईकोर्ट: “क्या ऐसी घटना होने पर कोई वाहन तैयार हैं? घायलों को किन अस्पतालों में ले जाया जाएगा? यह सब योजना में होना चाहिए।”
एडवोकेट जनरल: “सरकार इसे गंभीरता से ले रही है और एक योजना तैयार करेगी।”
हाईकोर्ट: “जब यह हादसा हुआ, तब क्या एम्बुलेंस मौजूद थीं?”
एडवोकेट जनरल: “हां, लेकिन पर्याप्त नहीं थीं। 2.5 लाख लोग आए क्योंकि बताया गया था कि प्रवेश मुफ्त है।”
हाईकोर्ट: “ये सभी हताहत स्टेडियम में ही हुए?”
एडवोकेट जनरल: “मुख्य प्रवेश द्वार पर।”
हाईकोर्ट: “जब आईपीएल मैच होते हैं, तो क्या व्यवस्था होती है?”
एडवोकेट जनरल: “इवेंट का प्रबंधन आरसीबी करती है। सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उनकी होती है।”
हाईकोर्ट: “क्या उन्होंने अनुमति ली थी?”
एडवोकेट जनरल: “भीड़ बहुत ज्यादा थी, लोग न सिर्फ बेंगलुरु से बल्कि पूरे राज्य और बाहर से भी आए थे।”
हाईकोर्ट: “कितने गेट हैं?”
एडवोकेट जनरल: “कुल 21 गेट हैं और निर्देश थे कि सभी गेट खुले रखे जाएं ताकि लोग अंदर बैठ सकें। लगभग 2 लाख लोग वहां मौजूद थे। हमने जांच शुरू कर दी है, नोटिस जारी किए गए हैं और एफआईआर भी दर्ज की गई है। हम किसी को बख्शने वाले नहीं हैं।”
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, “अखबारों में खबरें छपी हैं कि आरसीबी की जीत के जश्न के दौरान हुई त्रासदी में 11 लोगों की मौत हुई और 75 लोग घायल हुए। कोर्ट ने इस घटना का संज्ञान लिया है। वरिष्ठ वकील अरुण श्याम ने कहा कि विधान सौधा और स्टेडियम में दो आयोजन हुए थे। सरकार बताए कि एम्बुलेंस कहां तैनात थीं।”
कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी करते हुए कोर्ट ने कहा, “इस त्रासदी का कारण जानने और भविष्य में इसे रोकने के लिए हमने कई लोगों से इस बारे में जानकारी भी प्राप्त की है। हम राज्य सरकार को नोटिस जारी कर रहे हैं। हमने एडवोकेट जनरल से अपनी बात रखी है और उन्होंने एक स्टेटस रिपोर्ट दी है, जिसे रिकॉर्ड में लिया गया है। रजिस्ट्री को इस स्वत: संज्ञान को रिट याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया जाता है। मामले को 10 जून, मंगलवार को फिर से सूचीबद्ध करें।”
एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को क्या बताया?
कर्नाटक के एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि घटनास्थल पर पर्याप्त पुलिस तैनाती थी, लेकिन भीड़ अनुमान से कहीं ज्यादा थी। एडवोकेट जनरल ने कहा, “पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मिलाकर 1483 लोग तैनात थे। स्टेडियम के पास 2.5 लाख से ज्यादा लोग जमा थे। हम इस घटना को लेकर उतने ही चिंतित हैं जितना कोई और। मुख्यमंत्री ने पहला बयान दिया कि मुआवजा दिया जाएगा और घायलों का इलाज होगा। हम कल रात से काम कर रहे हैं। हम किसी भी सुझाव के लिए तैयार हैं।”
वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आरसीबी खिलाड़ियों को सम्मानित करने का फैसला किसने लिया। उन्होंने कहा, “जो खिलाड़ी देश के लिए नहीं खेल रहे, उन्हें सम्मानित करने की क्या जरूरत थी? भीड़ को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम या सुरक्षा उपाय थे? यह आपराधिक लापरवाही है। स्टेडियम के सिर्फ तीन गेट खोले गए थे, जबकि इतनी बड़ी भीड़ को समायोजित करने की क्षमता नहीं थी।” (इंडिया टीवी के अनुसार उनकी यह रिपोर्ट एजेंसियों से इनपुट्स के आधार पर बनाई गई है।)










