ये तो वही हुआ कि ‘खाया न पिया गिलास तोड़ा बारह आना’। जिस पदाधिकारी के बेटे का नाम शेष दो मैचों के लिए टीम की सूची में था, उसने बुधवार को स्पोर्ट्स मैन ्प्रिरट दिखाते हुए यूपीसीए को मेल कर उसका नाम वापस लेने की घोषणा कर दी। ये पदाधिकारी भी जानता था कि यूं भी सूची में 21वें खिलाड़ी के रूप में दर्ज उसके बेटे को खेलने को मिलना नहीं था। टीम के साथ लखनऊ और नागपुर घूमकर ही लौट आना था, क्योंकि दोनों महत्वपूर्ण मैच हैं और इसमें इस पदाधिकारी के पुत्र का रणजी डेब्यू होने की कोई गुंजाइश थी ही नहीं। वैसे भी आमतौर पर टीम में 15 या 16 के बाद बाकी खिलाड़ी तो जोड़-तोड़ वाले टूरिस्ट ही होते हैं, क्योंकि बीसीसीआई हर मैच में सिर्फ 15 की टीम को ही इजाजत देता है।
इस खेल के नेपथ्य में क्या कई खिलाड़ी?
दरअसल यूपीसीए में कौन खास है और कौन दुश्मन, इसका जल्द पता नहीं चल पाता। इस पदाधिकारी का बेटा भी इसी राजनीति का शिकार बन गया। दरअसल निशाना पिता ही थे। लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या इस खेल के नेपथ्य में कई खिलाड़ी थे? और ऐसा क्यों किया गया, कुछ जानकारियां मिली हैं। लेकिन इस मुद्दे पर फिर कभी चर्चा होगी। यूपीसीए में लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों पर कितना अमल होता है, यह किसी से छिपा नहीं है। लेकिन जब किसी का काम लगाना होता है तो पहले उससे गलती करवाई जाती है और फिर उसे वायरल करवाकर कठघरे में खड़ा करवा दिया जाता है। लेकिन फिलहाल इस पदाधिकारी ने बेटे का नाम वापस लेकर अपने विरोधियों को ही चित कर दिया है।
हितों के टकराव पर क्या आगे भी ऐसा ही होगा
खबर है कि यूपीसीए के इस पदाधिकारी के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। लेकिन विरोधियों की चाल भांप इस पदाधिकारी ने अपने बेटे का नाम वापस लेकर मामला ही खत्म कर दिया। लेकिन सवाल यह भी उठता है कि भविष्य में ऐसा फिर से होने पर अर्थात हितों के टकराव की स्थिति में क्या संबंधित पदाधिकारी ऐसा ही करेंगे? कुछ ‘बड़े खिलाड़ी’ तो पर्दे के पीछे से कथित तौर पर न सिर्फ टीम में अपने लड़के रखवाते हैं, बल्कि अपने बेटे को भी सलेक्ट करवा देते हैं, क्योंकि इस ‘बड़े खिलाड़ी’ के प्रभाव से सलेक्टर्स की घिग्घी बंधी रहती है और कोई चूं तक नहीं कर पाता। हां जो वास्तविक टैलेंट हैं वह गुम हो जाता है या जानबूझकर उसको मौका ही नहीं दिया जाता। इस प्रकरण के बाद यह भी संभव है कि मीडिया तक टीमों की सूची भेजने का सिलसिला फिर से बंद हो जाए या फिर दो सूची बनाई जाएं। एक मीडिया के लिए और दूसरी टीम के कप्तान और कोच की जानकारी के लिए।










