अंडर-19 विश्व कप फाइनल जैसे बड़े मुकाबले अक्सर युवा खिलाड़ियों की परीक्षा लेते हैं, लेकिन भारतीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने इस दबाव को अवसर में बदलते हुए खुद को भविष्य के भरोसेमंद सितारे के रूप में स्थापित कर दिया। इंग्लैंड के खिलाफ शुक्रवार को खेले गए खिताबी मुकाबले में वैभव की विस्फोटक और संतुलित पारी भारत के लिए मैच का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई।
भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने शुरुआती झटका जल्दी गंवा दिया। सलामी बल्लेबाज आरोन जॉर्ज मात्र 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। ऐसे समय में कप्तान आयुष म्हात्रे और वैभव सूर्यवंशी ने जिम्मेदारी संभालते हुए पारी को स्थिरता दी। दोनों बल्लेबाजों के बीच दूसरे विकेट के लिए 90 गेंदों में 142 रनों की शानदार साझेदारी हुई, जिसने भारत को मजबूत आधार प्रदान किया। आयुष ने संयमित बल्लेबाजी करते हुए 53 रन बनाए, जबकि दोनों विकेट इंग्लैंड के एलेक्स ग्रीन ने हासिल किए।
इस साझेदारी के दौरान वैभव ने जिस आत्मविश्वास और परिपक्वता का प्रदर्शन किया, वह उनकी उम्र से कहीं आगे का नजर आया। उन्होंने बिना अनावश्यक जोखिम लिए शानदार टाइमिंग और क्लीन हिटिंग का बेहतरीन नमूना पेश किया। वैभव ने मात्र 55 गेंदों में अपना शतक पूरा कर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। उनकी पारी में 8 चौके और 8 छक्के शामिल रहे, जो उनकी आक्रामक क्षमता और नियंत्रण दोनों को दर्शाते हैं।
इस शतक के साथ वैभव ने इतिहास भी रच दिया। वे अंडर-19 विश्व कप में भारत की ओर से सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने राज बावा का 69 गेंदों में बनाया गया रिकॉर्ड तोड़ दिया, जो वर्ष 2022 में युगांडा के खिलाफ बना था। इसके अलावा वैभव 60 गेंदों से कम में शतक लगाने वाले पहले भारतीय अंडर-19 बल्लेबाज भी बने।
शतक पूरा करने के बाद वैभव ने अपनी बल्लेबाजी का रुख और आक्रामक कर दिया। उन्होंने अगली 25 गेंदों में 75 रन जोड़ते हुए इंग्लैंड के गेंदबाजों पर पूरी तरह दबाव बना दिया। उनकी यह शानदार पारी 175 रन पर समाप्त हुई, जब मैनी ने उन्हें आउट किया, लेकिन तब तक भारत मुकाबले में निर्णायक बढ़त हासिल कर चुका था।
फाइनल तक पहुंचने के सफर में दोनों टीमों ने मजबूत प्रदर्शन किया था। इंग्लैंड ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराया था, जबकि भारत ने अफगानिस्तान को पराजित कर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी। हालांकि फाइनल में वैभव सूर्यवंशी की ऐतिहासिक पारी ने मुकाबले का रुख भारत की ओर मोड़ दिया और युवा भारतीय टीम के उज्ज्वल भविष्य की झलक पेश कर दी।










