वर्क लोड मैनेजमेंट देश के लिए खेलते समय ही क्यों, फिर रणजी खेलना क्यों अनिवार्य ?

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बेबाक/संजीव मिश्र

विश्व कप विजेता टीम के कप्तान कपिलदेव अपने कॅरिअर के दौरान लगातार इंटरनेशनल क्रिकेट खेले। उनको न कभी फिटनेस प्रॉब्लम नहीं हुई और न ही वर्क लोड मैनेजमेंट जैसी कोई रणनीति भारतीय क्रिकेट कंट्रोल (बीसीसीआई) को बनानी पड़ी। यह सही है कि उस समय इतना क्रिकेट नहीं होता था। अब क्रिकेटर इंटरनेशनल फिक्सचर से निकलते हैं तो लम्बे आईपीएल शैड्यूल में व्यस्त हो जाते हैं। उनके लिए घरेलू क्रिकेट भी अनिवार्य कर दिया गया है। जब ज्यादा खेलने से इंजरी होने लगीं तो उनके लिए वर्क लोड मैनेजमेंट की व्यवस्था कर दी गई।

अपने देश के लिए खेलना क्यों अनिवार्य नहीं?

जसप्रीत बुमराह जो भारत के प्रमुख गेंदबाज हैं, उन्हें हर सीरीज में इसकी जरूरत पड़ने लगी। अब मोहम्मद सिराज को भी इसी वर्क लोड मैनजमेंट के तहत आराम देने की चर्चा चल रही है। अहम सवाल यह है कि वर्कलोड मैनेजमेंट देश के लिए खेलते हुए ही क्यों लागू होता है? हर खिलाड़ी अपने क्रिकेट की शुरुआत देश के लिए खेलने का सपना लेकर ही तो करता है। बीसीसीआई आईपीएल के लिए खिलाड़ियों को वर्क लोड मैनेजमेंट के तहत कितने मैच खेलने चाहिए, सिर्फ उतने ही मैच खेलने की इजाजत दे। घरेलू क्रिकेट अनिवार्य हो सकता है, आईपीएल अनिवार्य हो सकता है तो देश के लिए खेलना क्यों नहीं अनिवार्य है? यह ताज्जुब है कि आप आईपीएल तो खेल सकते हैं लेकिन उसके तुरंत बाद देश के लिए खेलते समय कह देते हैं हम बस तीन ही मैच खेल पाएंगे।

आकाश दीप को मिला वर्कलोड मैनेजमेंट का फायदा

वर्क लोड मैनेजमेंट के तहत जसप्रीत बुमराह को आराम देकर आकाश दीप को मौका दिया। आकाश ने इस मौके पर पहली पारी में विकेटों का चौक्का तो दूसरी पारी में छक्का जड़ बाकी के तीन टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में अपना स्थान पक्का कर लिया। बुमराह को संभवत: विकेट का मिजाज परखने के बाद ही इस सोच के तहत ब्रेक दिया गया होगा कि एजबेस्टन में उन पर मेहनत ज्यादा पड़ेगी और रिजल्ट भी कुछ खास नहीं मिलेगा। लेकिन कहते हैं न कि हर इंसान अपना नसीब खुद लेकर आता है। आकाश दीप ने इस मौके को दोनों हाथों से लपकते हुए बर्मिंघम टेस्ट में 10 विकेट लेकर भारतीय जीत की पटकथा लिखने में अपने कप्तान शुभमन गिल को बराबर का सहयोग दिया।

बुमराह को हर बार आधी सीरीज खेलने की च्वाइस नहीं मिल सकती

बुमराह भले ही भारतीय क्रिकेट के लिए खरा सोना हों लेकिन उनकी अहमियत तभी तक है जब तक वह टीम को विकेट निकाल कर देंगे। उनकी फिटनेस को लेकर हमेशा संशय बना रहना भी उनके या टीम हित में नहीं है। उनसे मैच के दौरान बचा-बचा के गेंदबाजी करवाई जाती है। जब विपक्षी टीम पर दबाव बनाने की जरूरत होती है तब बुमराह थक चुके होते हैं। इसमें शक नहीं कि वह भारत के लिए अनमोल हैं लेकिन किसी महत्वपूर्ण सीरीज या मैच में यदि उनकी सेवाएं फिटनेस के चलते नहीं मिल पाती हैं, जैसा कि आस्ट्रेलिया दौरे के अंतिम टेस्ट की दूसरी पारी में हुआ था, तो यह गंभीर मसला है। आपको आधी सीरीज खेलने की च्वाइस हर बार नहीं मिल सकती। क्रिकेट बहुत बेरहम खेल है। आप तभी तक याद रखें जाते हैं जब तक रेगुलर टीम में रहकर परफार्मेंस करते हैं। आकाश दीप ने दूसरे टेस्ट में मेला लूट लिया।

विराट कोहली को अब कोई याद नहीं कर रहा

उदाहरण भी सामने है, सीरीज से पहले विराट कोहली के संन्यास पर हाय तौबा मची थी और आशंका जताई जा रही थी कि उनके बिना हम सीरीज 0-4 से हार सकते हैं, लेकिन शुभमन गिल, यशस्वी जयसवाल, केएल राहुल और रिषभ पंत की पहले दो टेस्ट में बल्लेबाजी ने उनकी चर्चा को खत्म कर दिया। आज कोहली को कोई याद नहीं कर रहा। बर्मिंघम टेस्ट में आकाश दीप, मोहम्मद सिराज के साथ यदि प्रसिद्ध कृष्णा का भी परफार्मेंस मिल जाता तो आज टीम मैनेजमेंट के सामने यह दिक्कत खड़ी हो जाती कि बुमराह की वापसी किस गेंदबाज की बलि देकर कराई जाए। या अगले टेस्ट में बुमराह फिर रेस्ट पर जाएं और उनकी जगह लेने वाले अर्शदीप सिंह बढ़िया खेल जाएं तब क्या होगा? कहने का मतलब है कि आप तभी तक महत्वपूर्ण हैं जब तक टीम में दिख रहे हैं और कुछ कर रहे हैं।

आपके पीछे खड़ा टैलेंट लगातार दस्तक दे रहा है

साफ है कि बुमराह को अपनी फिटनेस पर अब काफी ध्यान देना होगा, क्योंकि आपके पीछे खड़ा टैलेंट लगातार दस्तक दे रहा है। यह भी नहीं चलेगा कि आप आईपीएल तो खेलें लेकिन देश के लिए खेलते वक्त वर्क लोड बता कर अल्टरनेट व्यवस्था के तहत खेलने की च्वाइस रख दें। भारत को तीसरा टेस्ट 10 जुलाई से लार्ड्स में खेलना है। 5 टेस्ट मैचों की सीरीज में दोनों टीमें 1-1 की बराबरी के साथ तीसरे टेस्ट में उतरेंगी। एजबेस्टन में ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय टीम का मनोबल बेशक बढ़ा हुआ है लेकिन बर्मिंघम टेस्ट की जीत के बावजूद भारत अपनी कमियों पर पर्दा नहीं डाल सकता। अब सीरीज में आगे वो टीम ही रूल करेगी जो अपनी कमजोरियों पर काबू पा सकेगी। जोफ्रा आर्चर चार साल बाद इंग्लैंड की प्लेइंग इलेवन में लौट आए हैं। दो टेस्ट में बल्लेबाजी के लिए विकेट अनुकूल था लेकिन लार्ड्स में भारतीय बल्लेबाजों को स्थितियां बहुत अनुकूल नहीं मिलेंगी। इंग्लैंड के पेस अटैक को खेलना लॉर्ड्स में आसान नहीं होगा।

विनिंग टीम में बदलाव होना तय

हालांकि कोई भी टीम मैनेजमेंट विनिंग टीम की प्लेइंग इलेवन के साथ छेड़छाड़ नहीं करना चाहता लेकिन भारतीय टीम को यदि सीरीज जीतनी है तो प्लेइंग इलेवन में कुछ बदलाव तो करने ही पड़ेंगे, क्योंकि भारत को अगले तीन टेस्ट मैचों में इंग्लैंड पर पूरी ताकत से हमला बोलना होगा। बल्लेबाजी से खास शिकायत नहीं है लेकिन तीसरे नंबर पर न चल पाने वाले करुण नायर के विकल्प पर जरूर सोचना होगा। लम्बे समय से अपनी बारी का इंतजार करने वाले अभिमन्यु ईश्वरन को मौका दिया जा सकता है। इसके अलावा फॉर्म में चल रहे ध्रुव जुरैल भी बढ़िया विकल्प साबित हो सकते हैं।

क्या अर्शदीप सिंह होंगे चौथे सीमर?

यह तय हो चुका है कि जसप्रीत बुमराह तीसरा टेस्ट खेलेंगे। उनके लिए खराब प्रदर्शन करने वाले प्रसिद्ध कृष्णा को जगह खाली करनी पड़ सकती है। लॉर्ड्स के विकेट पर तेज गेंदबाजों का रिकॉर्ड अच्छा रहा है, इसलिए भारत यहां चौथे सीमर के रूप में अर्शदीप सिंह को प्लेइंग इलेवन में शामिल कर सकता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि अर्शदीप आएंगे किसकी जगह? यदि टीम मैनेजमेंट दो ऑलराउंडर्स के साथ टीम उतारने का फैसला करता है तो दूसरे टेस्ट में बुरी तरह फ्लॉप रहे नीतीश कुमार रेड्डी की जगह बुमराह, सिराज, आकाश के साथ अर्शदीप की चौथे सीमर के रूप में इन्ट्री करवा सकता है।

लॉर्ड्स में गेंद शुरुआत में सीम, उछाल और स्विंग करती है

वैसे भी लॉर्ड्स के मैदान में एक तरफ ढलान है। इससे वहां तेज गेंदबाजों को खास मदद मिलती है। इस विकेट पर तेज गेंदबाजी के लिए शुरुआत में उछाल और स्विंग रहती है। पहले सवा घंटे का खेल बल्लेबाजों के लिए काफी कठिन होता है। सीमर्स दो-तीन विकेट निकाल कर अपनी टीम के लिए मैच की दिशा तय कर सकते हैं। लेकिन यदि यह समय बल्लेबाज निकाल ले जाते हैं तो इस विकेट पर रन बनाए जा सकते हैं। मैच में समय गुजरने के साथ-साथ विकेट का मिजाज भी तब्दील होता जाता है। पिच पर सीम, उछाल और स्विंग शुरुआत जितनी नहीं रह जाती, इसलिए यहां टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी ही चुन सकती है।

अगले तीन टेस्ट में बेस्ट अटैक के साथ उतरना होगा, कुलदीप को लाएं

सूखे मौसम में, स्पिनरों को भी पिच से कुछ मदद मिल सकती है, खासकर अगर पिच सूख जाए। भारत सीरीज जीतना चाहता है तो उसे अगले तीनों टेस्ट में वर्कलोड मैनेजमेंट किनारे रखकर बेस्ट अटैक के साथ उतरना होगा। आश्चर्यजनक यह है कि अभी तक उसके मैच विनर और चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव को मौका नहीं मिला है। कुलदीप ऐसे स्पिनर है जो अपने वेरिएशन से किसी भी विकेट पर विपक्षी टीम को मुश्किल में डाल सकते हैं। इंग्लैंड के बल्लेबाज कुलदीप के खिलाफ वैसे भी कभी सहज नहीं दिखे हैं। हालांकि इस मैच में भी कुलदीप यादव का खेलना मुश्किल नजर आ रहा है। उनके लिए तभी जगह बन सकती है जब वाशिंगटन सुंदर को ड्रॉप किया जाए।

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