क्या कमला क्लब का अस्तित्व खत्म हो जाएगा, 28 मार्च को लीज खत्म!

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कानपुर का ग्रीनपार्क स्टेडियम दो ढाई साल तक न तो अन्तर्राष्ट्रीय और न ही घरेलू बोर्ड ट्राफी मैचों का कोई भी आयोजन करवा पाएगा, क्योंकि इस दौरान वहां पुनर्निमाण का काम होगा। दूसरी ओर इसी माह के अंतिम सप्ताह में कमला क्लब की लीज भी समाप्त हो रही है, जिसको रिन्यू करवाने के लिए यूपीसीए ने कोई आवेदन नहीं किया है। तो क्या उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) का 28 मार्च को कमला क्लब के साथ करार खत्म हो रहा है? हालांकि यूपीसीए मुख्यालय अभी बचा हुआ है, क्योंकि उसकी लीज संभवत: 2035 तक है लेकिन यदि जेके ग्रुप चाहे तो उसे भी दो महीने के नोटिस पर खाली करवा सकता है।

इससे यह भी साफ हो गया है कि कानपुर में अगले लगभग ढाई साल तक नेशनल या इंटरनेशनल लेवल की कोई भी क्रिकेट गतिविधि नहीं होंगी। तो क्या कानपुर से क्रिकेट के मुख्यालय को लखनऊ या किसी अन्य शहर में शिफ्ट करने की गुपचुप तैयारी है? क्योंकि जब क्रिकेट ही नहीं रह जाएगा तो मुख्यालय कानपुर में बनाए रखने का कोई औचित्य भी नहीं होगा। यदि लीज रिन्यू नहीं हो रही है तो जल्दी ही कमला क्लब में क्रिकेट इतिहास बनकर रह जाएगा। सूत्रों के मुताबिक यूपीसीए के एक शीर्ष पदाधिकारी के प्रयास से ही ताज ग्रुप के साथ जेके घराने ने बड़ी डील की थी। यानि यूपीसीए खुद भी अब इस ग्राउंड से नाता रखने का इच्छुक नहीं था।

कमला क्लब यूपीसीए के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में से एक अभिषेक सिंघानिया की संपत्ति बताई जाती है। हाल के वर्षों में कमला क्लब की जमीन पर टाउनशिप व अन्य विकास कार्यों के लिए निवेश और विकास योजनाएं चल रही हैं, जिसमें बड़े स्तर पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट प्रस्तावित किए गए हैं। बताया जा रहा है कि जेके घराने ने कमला क्लब की अधिकांश भूमि पर ताज ग्रुप के साथ एक बड़ा करार किया है। ताज ग्रुप कालपी रोड स्थित इस मैदान के बड़े हिस्से पर होटल निर्माण करने जा रहा है। इसकी तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं।

इससे साफ नजर आ रहा है कि क्रिकेट की गतिविधियों के लिए कमला क्लब में अब स्थान नहीं बचेगा। यानि कई फर्स्ट क्लास और लिस्ट ए मैच का गवाह रहे इस खूबसूरत मैदान से क्रिकेट को अलविदा कहने का समय आ गया है। बता दें कि कमला क्लब कानपुर का एक पुराना खेल मैदान रहा है, जो खास तौर पर क्रिकेट के लिए जाना जाता है। यह मैदान एक बहुउद्देशीय स्टेडियम के रूप में विकसित हुआ, जहां क्रिकेट के साथ अन्य खेल गतिविधियां भी कराई जाती रही हैं। यह उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की अकादमी का होम ग्राउंड भी रहा।

कमला क्लब ग्राउंड पर पहला फर्स्ट क्लास मैच 1987 में नॉर्थ जोन और साउथ ज़ोन के बीच खेला गया था। 1988 से 2007 के बीच यहां कई फर्स्ट क्लास मैच खेले गए। बोर्ड की विजय हजारे ट्रॉफी के मैच भी यहां खेले जा चुके हैं। 2007 के बाद से यह मैदान मुख्य रूप से नॉन फर्स्ट क्लास, जूनियर व घरेलू स्तर की प्रतियोगिताओं, कैंप और यूपीसीए अकादमी की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होता रहा। अब यहां पर सेलेक्शन ट्रायल्स बंद होने के साथ ही हॉस्टल और जिम भी खत्म हो जाएगा।

ऑल इंडिया सर पदमपत सिंहानिया ब्रिज प्रतियोगिता का सिल्वर जुबली एडिशन भी कमला क्लब में न करवा कर कानपुर क्लब में करवाया गया, जिससे भी यह संकेत मिले कि जेके घराना अब किसी भी तरह की खेल गतिविधियों को यहां से धीरे-धीरे शिफ्ट कर रहा है। मान कर चलिए कि कमला क्लब अब क्रिकेट के लिए कई सुनहरी यादें छोड़कर विदा लेने को तैयार है।

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