इलाहाबाद हाईकोर्ट से यूपीसीए को बड़ी राहत, सीएयूपी की याचिका खारिज

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साभार : गूगल

लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रिट-सी संख्या 3329/2026 द क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश बनाम उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन एवं अन्य में उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सीएयूपी की याचिका खारिज कर दी।

न्यायालय ने याचिका में की गई विभिन्न मांगों और उठाए गए दावों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। माननीय न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं माननीय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने अपने निर्णय में माना कि वर्ष 2005 में तत्कालीन सोसाइटी के विघटन और उसकी परिसंपत्तियों, दायित्वों तथा कार्यों का उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन कंपनी को हस्तांतरण विधिसम्मत था।

न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के लिए राज्य सरकार की अनुमति आवश्यक नहीं थी, क्योंकि सरकार यह स्थापित नहीं कर सकी कि उसका उस संस्था में कोई वित्तीय योगदान अथवा हित था।

न्यायालय ने याचिकाकर्ता की उन मांगों को भी अस्वीकार कर दिया, जिनमें यूपीसीए की परिसंपत्तियां और संसाधन उसे हस्तांतरित करने, बीसीसीआई को निर्देश जारी करने, यूपीसीए को क्रिकेट गतिविधियों के संचालन से रोकने, सीबीआई अथवा अन्य एजेंसी से जांच कराने तथा यूपीसीए की बीसीसीआई से संबद्धता और वित्तीय सहायता की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग शामिल थी।

न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी दर्ज किया कि उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) पिछले लगभग दो दशकों से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का पूर्ण सदस्य है तथा उसे बीसीसीआई में मतदान का अधिकार प्राप्त है।

फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की मीडिया कमेटी के सह-अध्यक्ष डॉ. संजय कपूर ने कहा कि माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह निर्णय सत्य और यूपीसीए की वैधानिक स्थिति को स्पष्ट करता है।

उन्होंने कहा कि सीएयूपी द्वारा यूपीसीए से मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल कर स्वयं को प्रदेश की मान्यता प्राप्त क्रिकेट संस्था के रूप में प्रस्तुत करना फर्जी और भ्रामक है, जिससे खिलाड़ियों, जिला क्रिकेट संघों और आम जनता के बीच भ्रम पैदा करने का प्रयास किया गया।

डॉ. कपूर ने कहा कि न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि यूपीसीए का गठन, पुरानी सोसाइटी की संपत्तियों एवं दायित्वों का हस्तांतरण तथा बीसीसीआई से उसकी संबद्धता स्थापित व्यवस्था के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि अब इस विवाद को समाप्त कर सभी को उत्तर प्रदेश में क्रिकेट और खिलाड़ियों के विकास के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

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