आयु सत्यापन और बोन टेस्ट पर यूपीसीए ने दिया स्पष्टीकरण, आरोपों को बताया भ्रामक

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) ने अंडर-16 क्रिकेट खिलाड़ियों के आयु सत्यापन और बोन टेस्ट को लेकर प्रकाशित खबरों पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए एसोसिएशन के खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार और भ्रामक बताया है।

बीसीसीआई के पर्यवेक्षक की मौजूदगी में होती है प्रक्रिया, दस्तावेजों की दोबारा जांच की खबर को भी किया खारिज

यूपीसीए ने कहा कि आयु सत्यापन की पूरी प्रक्रिया भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक की मौजूदगी में होती है और इसमें बोर्ड के निर्धारित निर्देशों का पालन किया जाता है।

एसोसिएशन के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान खिलाड़ियों के संबंधित दस्तावेजों और एक्स-रे को बीसीसीआई पर्यवेक्षक संभालता है। 28 अक्टूबर को प्रकाशित खबरों के संबंध में यूपीसीए ने बीसीसीआई के संबंधित अधिकारी से भी स्थिति स्पष्ट की।

एसोसिएशन का दावा है कि अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, इन खबरों के आधार पर दस्तावेजों की दोबारा जांच नहीं की जा रही है। ऐसे में दस्तावेजों की पुनः जांच शुरू होने संबंधी दावे को यूपीसीए ने तथ्यहीन बताया है।

बोन टेस्ट की रेटिंग में अंतर को बताया स्वाभाविक

यूपीसीए ने बोन टेस्ट की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए कहा कि टीडब्लू 3 (TW3) पद्धति में हाथ और कलाई के एक्स-रे के आधार पर हड्डियों के विकास का आकलन किया जाता है।

जन्मतिथि के अनुसार उम्र हर साल एक वर्ष बढ़ती है, लेकिन हड्डियों का विकास सभी बच्चों में एक समान गति से नहीं होता। इस पर खानपान, हार्मोन, स्वास्थ्य और आनुवंशिक कारणों का प्रभाव पड़ सकता है।

एसोसिएशन के मुताबिक, इसी वजह से समान उम्र के दो बच्चों की बोन एज अलग हो सकती है। एक साल बाद बोन टेस्ट की रेटिंग में ठीक एक वर्ष की बढ़ोतरी होना भी जरूरी नहीं है। हड्डियों में बदलाव कम होने या एक्स-रे के आकलन में अंतर के कारण रेटिंग पहले जैसी रह सकती है।

इसलिए केवल रेटिंग की तुलना के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में दोनों एक्स-रे और उनकी जांच की प्रक्रिया का विशेषज्ञों द्वारा आकलन जरूरी है।

गलत दस्तावेज मिलने पर कार्रवाई का प्रावधान

एसोसिएशन ने बताया कि आयु सत्यापन प्रक्रिया में शामिल सभी खिलाड़ियों के माता-पिता या कानूनी अभिभावक दस्तावेजों के सत्यापन के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करते हैं।

इसके माध्यम से बीसीसीआई, संबंधित राज्य क्रिकेट एसोसिएशन और बोर्ड की अधिकृत एजेंसी को खिलाड़ी व अभिभावक के दस्तावेजों, पहचान तथा पुराने रिकॉर्ड की जांच की अनुमति दी जाती है।

यूपीसीए के अनुसार, सहमति पत्र में यह भी स्पष्ट है कि कोई दस्तावेज या जानकारी गलत, फर्जी अथवा छेड़छाड़ की हुई पाए जाने पर बीसीसीआई के नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसमें खेलने पर प्रतिबंध भी शामिल है।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि अंडर-16 प्रतियोगिताओं में टीडब्लू 3 (TW3) पद्धति अपनाने के बीसीसीआई के नीतिगत निर्णय को दिल्ली हाईकोर्ट का न्यायिक समर्थन प्राप्त है।

माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने 22 सितंबर 2015 को बीसीसीआई बनाम आर्यन सहरावत एवं अन्य तथा संबंधित अपील, एलपीए संˆया 52/2014 एवं 53/2014 में अंडर-16 प्रतियोगिताओं के लिए इस पद्धति को अपनाने के बीसीसीआई के नीतिगत निर्णय को उचित माना था और उसमें हस्तक्षेप करने से इन्कार किया था। यूपीसीए ने कहा कि वह निष्पक्ष चयन, पारदर्शिता और पात्र खिलाड़ियों को समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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