-अंडर 23 कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी के लिए सिलेक्शन ट्रायल मैचों में मोहम्मद आमिर खान और सीएसी के चेयरमैन करते दिखाई दिए चयन
संजीव मिश्र
लखनऊ। यूपीसीए ने एक और कमाल किया है। उसने एक टीम के हेड कोच को उसी की टीम का सिलेक्टर बना दिया। कमला क्लब और मंधना के चन्द्रा क्रिकेट ग्राउंड में कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी के लिए अंडर-23 के सिलेक्शन ट्रायल मैच आज पूरे हो गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि मंधना में हुए ट्रायल मैचों में सिलेक्टर्स की भूमिका क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन कपिल पांडेय और अंडर-23 के हेड कोच मोहम्मद आमिर को सौंपी गई थी। ऐसा यूपी टी-20 लीग से पहले आशीष विंस्टन जैदी, मृत्युंजय त्रिपाठी और उत्कृर्ष चन्द्रा के इस्तीफा देने से सीनियर चयन समिति के सिर्फ दो सदस्यीय रह जाने की वजह से हुआ। यानि अब कोच अपनी टीम का चयन खुद ही करेगा। यूं भी समझ सकते हैं कि जैसे बीसीसीआई हेड कोच गौतम गंभीर को टीम इंडिया चुनने की छूट दे दे।
यूपीसीए ने चयन समिति की खाली जगह न भरकर सीएसी और एक सपोर्ट स्टाफ को बतौर सिलेक्टर टीम चुनने की प्रक्रिया में शामिल कर एक नये विवाद को जन्म दे दिया है। दरअसल जैसा दिख रहा है, वैसा है नहीं। कथित तौर पर इस तैनाती की आड़ में यूपीसीए में सभी नियुक्तियों का मास्टर माइंड (राजीव शुक्ला नहीं) नये सीजन से पहले अपनी दुकानदारी सजा रहा है। इसीलिए सिलेक्शन कमेटी में अभी तक खाली जगह को नहीं भरा गया। दोनों ही उस मास्टर माइंड के खास हैं। इनको कमला क्लब न भेजकर शहर से दूर मंधना इसीलिए भेजा गया ताकि ये दोनों मीडिया की नजर में न आ सकें।
अब ये ऊपर के इशारे पर संभावित खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया में प्रवीण कुमार और रिजवान शमसाद का सहयोग करेंगे। कमला क्लब में प्रवीण कुमार और रिजवान शमसाद सलेक्शन देख रहे हैं। रविवार को मंधना स्थिति ग्राउंड में आमिर और कपिल को ट्रायल मैच के दौरान खिलाड़ियों से बात करते देखा गया। सवाल उठ सकता है कि यूपीसीए जहां मर्जी होती है वहां तो हितों के टकराव की अनदेखी कर देता है, वहीं यदि कोई नापसंद पदाधिकारी ऐसा करता है तो उसे इतना वायरल करवाता है कि उसे अपनी गल्ती सुधारनी पड़ जाती है। कमाल की बात यह है कि क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन ने भी यह दायित्व कैसे स्वीकार कर लिया, जबकि वह संविधान से वाकिफ थे और सीएसी में ही उनको रखने का एजीएम में विरोध हुआ था। यूपीसीए भी ऐसा कैसे कर सकता है जबकि उसका अपना संविधान ही कहता है कि जो खिलाड़ी यूपी छोड़कर किसी अन्य राज्य से खेला हो उसे कभी किसी भी कमेटी में जगह नहीं दी जा सकती।
अब अंडर 23 के लिए ज्यादातर नाम इसी मैदान (चन्द्रा क्रिकेट ग्राउंड) में रखे गए ट्रायल मैचों से चुने जा सकते हैं। जब फाइनल सिलेक्शन होगा तो उसमें भी 15 के अलावा कुछ अतिरिक्त नाम टीम के साथ ट्रैवल कर सकते हैं। कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी के लिए 12 अक्तूबर को यूपी अपना पहला मैच महाराष्ट्र से मेरठ में खेलेगी, जबकि दूसरे मैच में उसका मुकाबला 19 अक्तूबर से आन्ध्र प्रदेश से लखनऊ में होगा। आज सिलेक्शन मैच खत्म होने के बाद टीम की घोषणा नहीं की गई। लड़कों को वापस भेज दिया गया है। टीम के चयन की प्रक्रिया काफी लेट हो चुकी है, जिससे रणजी की तरह ही इस टीम को भी कैम्प का समय काफी कम मिलेगा। ज्यादा से ज्यादा 10 अक्तूबर तक ही कैम्प लग पाएगा। लेकिन अभी तो टीम का चयन ही नहीं हुआ है। टीम के लिए जिन 15 से 18 लड़कों का चयन होगा उनको सीधे फोन से सूचित कर दिया जाएगा। यह भी संभव है कि कैम्प मेरठ में ही लगा दिया जाए, जहां मैच होना है।










