– संजय कपूर टी-20 लीग के चेयरमैन पद पर बरकरार, संजीव सिंह भी फिर गवर्निंग काउंसिल में
लखनऊ। कानपुर के होटल लैंडमार्क में बुधवार को प्रेसिडेंट डॉ. निधिपत सिंहानिया की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) की 21वीं वार्षिक आमसभा (एजीएम) हंगामे के बाद बिना कमेटियों के घोषणा के खत्म हो गई। एजीएम में संघ उपाध्यक्ष ने क्रिकेट हित में कुछ सुझाव दिए और कुछ गल्तियां बताईं तो हंगामा हो गया, इससे संघ के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चलने के संकेत मिले। पूरी एजीएम में पूर्व सचिव युद्धवीर सिंह की चुप्पी भी चर्चा में रही।
इससे पहले यूपी टी-20 लीग का कानपुर और लखनऊ में शानदार आयोजन करने वाले डॉ. संजय कपूर को यूपी टी-20 लीग का चेयरमैन बरकरार रखा गया है। उनके साथ गाजीपुर के संजीव सिंह को भी सदस्य के रूप में गवर्निंग काउंसिल में फिर से जगह दी गई है। यूपीसीए के लाइफ मेम्बर राजीव शुक्ला बीसीसीआई में यूपीसीए के प्रतिनिधि होंगे, जबकि उनकी अनुपस्थिति में यह भूमिका लाइफ मेम्बर युद्धवीर सिंह निभाएंगे।
यूपीसीए उपाध्यक्ष राकेश मिश्रा ने सवाल उठाया कि क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी (सीएसी) का गठन किसने किया है? उन्होंने सपोर्ट स्टाफ और चयन समितियों में पूर्व सीनियर खिलाड़ियों और नये चेहरों की अनदेखी पर भी सवाल उठाया और कहा कि सौ-सौ मैच खेले खिलाड़ी भी बाहर बैठे हैं। उपाध्यक्ष ने क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी (सीएसी) का गठन संविधान के मुताबिक करने को कहा। इस पर सचिव प्रेम मनोहर गुप्ता ने कहा कि कमेटी का गठन संविधान के मुताबिक ही किया गया है। राकेश मिश्रा ने उन्हें बताया कि संविधान के 26वें प्वाइंट में साफ लिखा है कि जो खिलाड़ी राज्य छोड़कर बाहर खेलने चला गया हो, उसे सीएसी में नहीं लिया जा सकता। इस पर सचिव ने कहा कि आपके पास पुराना संविधान है, जबकि नए संविधान में ऐसा नियम नहीं है।
उपाध्यक्ष ने सवाल किया कि यह संविधान कब बना और कहां है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। बता दें कि क्रिकेट संघ के संविधान में बदलाव एजीएम के ओपन हाउस में ही किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक इसके बाद यूपीसीए अवैतनिक संयुक्त सचिव ओमेर मुस्तफा हसन ने कुछ ऑफिस-बियरर्स की कार्यप्रणाली और नियमों के उल्लंघन को लेकर हाईकोर्ट में दायर केस पर भी यूपीसीए उपाध्यक्ष को घेरा। अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक यहां तक कहा गया कि अपने ही ऑफिस-बियरर्स के खिलाफ केस लड़ना है तो आप पहले इस्तीफा दें फिर मुकाबले में उतरें। इसी मुद्दे पर 7-8 मिनट तक बहस चलती रही।
बाद में बीसीसीआई उपाध्यक्ष और पूर्व यूपीसीए सचिव राजीव शुक्ला ने सभी से साकारात्मक होकर काम करने की अपील की। कहा कि हम एक परिवार की तरह हैं लेकिन यदि एक दूसरे से लड़ते रहेंगे तो क्रिकेट को आगे कैसे ले जाएंगे। पहले भी ऐसा हो चुका है। कहा कि हमें आपस के विवाद को मीडिया में नहीं ले जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी सिर्फ यूपी से गोपाल शर्मा ही एकमात्र टेस्ट खिलाड़ी हुआ करते थे, जबकि आज यूपी क्रिकेट ने इतनी तरक्की की है कि कुलदीप यादव, रिंकू सिंह जैसे खिलाड़ी विश्व क्रिकेट में चमक रहे हैं।
उन्होंने वाराणसी के क्रिकेट स्टेडियम का 99 फीसदी काम हो जाने और बाकी काम एक दो महीने में पूरा हो जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वाराणसी का स्टेडियम पूर्ण रूप से यूपीसीए के स्वामित्व वाला पहला स्टेडियम होगा। बताया कि गाजियाबाद में भी स्टेडियम का काम तेजी से चल रहा है। बाद में मीडिया से बातचीत में संकेत दिए कि वाराणसी स्टेडियम में वुमन प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) करवाई जा सकती है।
प्लेयर्स क्रिकेट एसोसिएशन के सदस्य इन्दरपाल सिंह गहलोत ने उन खिलाड़ियों की आर्थिक मदद की गुजारिश की, जिन्होंने अपने राज्य के लिए एक से लेकर 24 मैच खेले हैं। कहा कि ऐसे खिलाड़ियों को बीसीसीआई से भी कोई पेंशन नहीं मिलती। इस पर राजीव शुक्ला ने बताया कि यह मामला बीसीसीआई में उठा था और बोर्ड ने 1 से 24 मैच खेलने वाले खिलाड़ियों को स्टेट को ही देखने को कहा है। उन्होंने कहा कि जब युद्धवीर सिंह सचिव थे तब खिलाड़ियों को एक मुश्त मदद की गई थी।
इन्दरपाल सिंह ने उन्हें बताया कि राज्य में 1 से 10 मैच खेले 51 खिलाड़ी हैं जिन्हें 8 हजार रुपए प्रतिमाह और 11 से 24 मैच खेलने वाले 8 खिलाड़ियों को यदि 12 हजार हर महीने की आर्थिक सहायता मिल सके तो उनको न सिर्फ सम्मान मिलेगा, बल्कि उनकी मदद भी हो जाएगी। इससे संघ पर हर माह सिर्फ 6 लाख रुपए का खर्च ही आएगा, जबकि इससे 59 खिलाड़ियों को लाभ मिल सकेगा। इस मामले में राजीव शुक्ला ने संघ के सीए से वर्कआउट करने को कहा है।










