दादा ने देखा था क्रिकेटर बनने का सपना, पिता ने अभावों में पाला; अब गूंज रहा हिमांशु के बल्ले का शोर

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लखनऊ। एक पिता कंस्ट्रक्शन साइट पर गार्ड की नौकरी करते रहे, परिवार सीमित संसाधनों में आगे बढ़ता रहा और एक दादा ने करीब 15 साल पहले अपने पोते की आंखों में छिपे क्रिकेट के सपने को पहचान लिया।

अमेठी के खरेथु गांव से निकले हिमांशु सिंह ने यूपी टी-20 लीग में शानदार पारियों से बनाई पहचान

तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि अमेठी के एक छोटे से गांव की गलियों से शुरू हुआ यह सफर एक दिन भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम की फ्लडलाइट्स तक पहुंचेगा। आज वही सपना यूपी टी20 लीग मे 2026 में लखनऊ फाल्कन्स के युवा बल्लेबाज हिमांशु सिंह के बल्ले से आकार ले रहा है।

भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की कप्तानी वाली लखनऊ फाल्कन्स के लिए खेल रहे हिमांशु ने लगातार प्रभावशाली पारियां खेलकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। काशी रुद्रास के खिलाफ उन्होंने महज 41 गेंदों में 64 रन की मैच जिताऊ पारी खेलकर इकाना में मौजूद दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद भी उनके बल्ले की धार जारी रही और हिमांशु ने लगातार दूसरे मैच में भी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

यह सिर्फ दो शानदार पारियों की कहानी नहीं है। इसके पीछे अमेठी के ब्लॉक संग्रामपुर के ग्राम खरेथु से निकलकर पेशेवर क्रिकेट तक पहुंचने वाले एक ऐसे परिवार की कहानी है, जिसने सीमित साधनों के बावजूद अपने बेटे के सपने को कभी छोटा नहीं होने दिया।

दादा ने 2011 में पहचाना था हुनर

हिमांशु के स्वर्गीय दादा भारत सिंह (गांधी) ने वर्ष 2011 में उनके भीतर छिपी क्रिकेट प्रतिभा को पहचान लिया था। पोते को बड़ा क्रिकेटर बनाने का सपना उन्होंने तभी देख लिया था। इसी सपने को पूरा करने के लिए हिमांशु को पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ पेशेवर क्रिकेट प्रशिक्षण की ओर बढ़ाया गया।

परिवार के लिए यह आसान फैसला नहीं था। हिमांशु के पिता हरिकेश सिंह कंस्ट्रक्शन साइट पर गार्ड की नौकरी करते हैं। सीमित आमदनी और तमाम पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने बेटे के क्रिकेट के रास्ते में संसाधनों की कमी को बाधा नहीं बनने दिया। दादा का सपना और पिता की मेहनत धीरे-धीरे हिमांशु की क्रिकेट यात्रा की नींव बनते गए।

परिवार में मेहनत और देशसेवा की इसी परंपरा की एक और मिसाल हिमांशु के भाई प्रियांशु सिंह हैं, जो भारतीय वायुसेना में सेवा दे रहे हैं। एक ओर भाई देश की सेवा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर हिमांशु क्रिकेट के मैदान पर परिवार का नाम रोशन करने की कोशिश में जुटे हैं।

यूपीटी20 ने बड़े मंच पर खुद को साबित करने का मौका

हिमांशु की कहानी इस बात का उदाहरण भी है कि किस तरह यूपी टी20 लीग प्रदेश के छोटे शहरों और गांवों से निकलने वाले खिलाड़ियों को बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दे रही है।

यूपी टी20 लीग की गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन डॉ. संजय कपूर ने हिमांशु की सफलता को लीग के उद्देश्य से जोड़ते हुए कहा कि ग्रामीण अंचलों के उन खिलाड़ियों को मंच देना लीग की प्राथमिकता रही है, जिनके पास संसाधनों और सुविधाओं की कमी होती है।

उन्होंने कहा कि जब हिमांशु सिंह, शक्ति वर्मा, शुभम गौतम और कृष्णा सरोज जैसे युवा खिलाड़ी इकाना जैसे बड़े मंच पर मैच जिताऊ प्रदर्शन करते हैं तो लीग शुरू करने का सपना साकार होता दिखाई देता है। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश से कई ऐसे खिलाड़ी निकल सकते हैं जो आईपीएल और भारतीय टीम तक पहुंचें।

पंकज सिंह और प्रशांत वीर की विरासत में नया नाम

क्रिकेट के लिहाज से अमेठी के लिए हिमांशु का उभरना इसलिए भी खास है क्योंकि इस क्षेत्र ने पहले भी प्रतिभाशाली क्रिकेटर दिए हैं। पंकज सिंह अमेठी से निकलने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों में रहे हैं और राजस्थान रॉयल्स के साथ-साथ भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

इसके बाद प्रशांत वीर ने यूपी टी20 लीग में में शानदार प्रदर्शन के दम पर अपनी पहचान बनाई और आईपीएल ऑक्शन में चेन्नई सुपर किंग्स से जुड़े। अब हिमांशु सिंह इसी क्रिकेट परंपरा में अपना नाम जोड़ने की दिशा में बढ़ रहे हैं। खरेथु गांव से निकलकर इकाना की रोशनी में अपनी बल्लेबाजी का जलवा दिखाने वाले हिमांशु ने फिलहाल सिर्फ शुरुआत की है, लेकिन उनके प्रदर्शन ने अमेठी के क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदें जरूर बढ़ा दी हैं।

शांभवी सिंह ने भी दी बधाई

हिमांशु की सफलता पर अमेठी में भी खुशी का माहौल है। अमेठी राजपरिवार से ताल्लुक रखने वालीं और पूर्व विधायक गरिमा सिंह की बहू समाजसेवी शांभवी सिंह ने सोशल मीडिया पर हिमांशु की तस्वीर साझा कर उन्हें और उनके परिवार को बधाई दी। उन्होंने हिमांशु को खरेथु और पूरे अमेठी का गौरव बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मामा बोले- आज ग्रामीण खिलाड़ियों के लिए रास्ते खुले हैं

हिमांशु के मामा शौर्य प्रताप सिंह भी उनकी सफलता को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि एक समय वह खुद क्रिकेट खेलते थे, लेकिन उस दौर में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण खिलाड़ियों को इस स्तर का एक्सपोजर और सुविधाएं नहीं मिलती थीं।

उनके मुताबिक आईपीएल और खास तौर पर यूपी टी20 लीग के आने के बाद तस्वीर बदली है। अब गांवों से आने वाले खिलाड़ियों को बड़े मंच पर खुद को साबित करने का मौका मिल रहा है और उनके लिए आईपीएल तथा भारतीय टीम तक पहुंचने के रास्ते खुल रहे हैं।

खरेथु की मिट्टी से इकाना की फ्लडलाइट्स तक हिमांशु सिंह का सफर अभी लंबा है। लेकिन जिस दादा ने वर्षों पहले अपने पोते में क्रिकेटर देखा था, जिस पिता ने अभावों के बावजूद उसके सपने को जिंदा रखा और जिस परिवार ने हर मुश्किल में उसका साथ दिया, उनकी मेहनत का जवाब अब हिमांशु का बल्ला दे रहा है।

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