सबसे बड़े मैच में नहीं चला मैसी मैजिक, स्पेन बना नया चैम्पियन

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-फीफा वर्ल्ड कप फाइनल मेंअर्जेन्टीना को 1-0 से हराया

न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में आज स्पेन नया विश्व चैम्पियन बनकर उभरा। उसने एकतरफा फाइनल में लियोनेल मेसी की अगुवाई वाली अर्जेंटीना टीम को 1-0 से हराया। अर्जेन्टीना इस वर्ल्ड कप का सबसे खराब प्रदर्शन किया और अपने खिताब की रक्षा नहीं कर सका। यह टीम आज कभी भी मैच में नहीं दिखी। दूसरी ओर स्पेन को कई मौके मिले लेकिन खराब फिनिशिंग और अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज के शानदार प्रदर्शन से उसके ज्यादातर प्रयास विफल रहे। निर्धारित समय तक स्कोर 0-0 से बराबर था। ऐसे में मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में पहुंचा, जहां स्पेन ने जीत हासिल की। 106वें मिनट में सब्स्टीट्यूट प्लेयर फेरान टोरेस ने गोल दागा। टोरेस को एक अन्य सब्स्टीटयूट खिलाड़ी निको विलियम्स ने पास दिया, जिसपर वो गोल करने में कामयाब रहे।

स्पेन ने 16 साल का सूखा खत्म किया। स्पेन ने दूसरी बार फीफा वर्ल्ड कप जीता है. इससे पहले 2010 में ये टीम चैम्पियन बनी थी.वहीं अर्जेंटीना की टीम चौथी बार वर्ल्ड कप खिताब नहीं जीत सकी। अर्जेंटीना की टीम इटली और ब्राजील जैसा कारनामा नहीं कर पाई, जिसने बैक टू बैक टाइटल जीते थे। इटली ने 1934 और 1938 में खिताबी जीत हासिल की थी, जबकि ब्राजील की टीम ने 1958 और 1962 का संस्करण अपने नाम किया था. फाइनल में अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी का जादू बिल्कुल भी नहीं चला। खिताबी मुकाबले तक पहुंचने का दोनों टीमों का सफर आसान नहीं रहा।

स्पेन ने फ्रांस और पुर्तगाल जैसी मजबूत टीमों को हराया, जबकि अर्जेंटीना ने लगातार तीन नॉकआउट मुकाबलों में अतिरिक्त समय तक चले रोमांचक मैच जीतकर फाइनल में जगह बनाई थी। मुकाबले का पहला हाफ टक्कर वाला रहा, जिसमें एक भी गोल नहीं हुआ। पहले हाफ में स्पेनिश टीम ने ज्यादा अटैकिंग खेल दिखाया। उसने दो मौके पर शॉट ऑन टारगेट रखा. दूसरी ओर अर्जेंटीना की ओर से एक भी शॉट नहीं लिया गया। पहले हाफ में बॉल पोजेशन भी 65 प्रतिशत स्पेनिश टीम के पक्ष मेंरहा। कप्तान लियोनेल मेसी को स्पेनिश खिलाड़ियों ने मार्क करके रखा और वो कुछ खास नहीं कर पाए।

दूसरी ओर लैमिन यामाल भी कमाल कर नहीं कर सके। पहले हाफ में अर्जेंटीना के डिफेंडर लिसांड्रो मार्टिनेट को येलो कार्ड मिला। हालांकि वो कुछ देर बार चोटिल हो गए और उन्हें सब्स्टीट्यूट कर दिया गया। लिसांड्रो मार्टिनेज की जगह निकोलस ओटामेंडी उतरे। दूसरे हाफ में स्पेनिश टीम का पूरी तरह दबदबा रहा और उसने 68 प्रतिशत बॉल पजेशन अपने पास रखी। ये अलग बात रही कि उसने कोई गोल नहीं दागा। 8 मौके पर स्पेनिश टीम गोलपोस्ट पर सटीक निशाना लगाने में सफल रही, हालांकि इन सभी प्रहारों का गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने सफलतापूर्वक बचाव किया। अर्जेंटीना की टीम दूसरे हाफ में भी एक भी शॉट टारगेट पर नहीं रख सकी।

दूसरे हाफ के इंजरी टाइम में अर्जेंटीना को बड़ा झटका लगा, जब अर्जेंटीना के मिडफील्डर एंजो फर्नांडेज को रेड कार्ड दिखा दिया गया और उनका फाइनल वहीं खत्म हो गया। अर्जेंटीना सिर्फ 10 खिलाड़ियों से खेला। 4 मिनट का अतिरिक्त वक्त खत्म होने से ठीक पहले फर्नांडेज ने स्पेन के कुबारसी को खतरनाक अंदाज में टैकल किया था, जिससे वो गिर गए। रेफरी ने तुरंत फाउल के लिए सीटी बजाई और अपनी जेब से येलो कार्ड निकाल दिया। कुछ ही मिनट पहले फर्नांडेज को एक येलो कार्ड दिखाया जा चुका था। ये इस मैच में उनका दूसरा येलो कार्ड था और इसलिए रेफरी ने उन्हें रेड कार्ड दिखाकर बाहर कर दिया।

स्पेन की हर कोशिश नाकाम रही है और पूरे 90 मिनट का खेल खत्म होने तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी तो मुकाबला एक्सट्रा टाइम में पहुंच गया, जिसमें 15-15 मिनट के दो हाफ खेले गए। इंजरी टाइम के आखिरी मिनट पर स्पेन को बॉक्स के पास फ्री-किक मिली, जिस पर लमीन यमाल ने बेहतरीन शॉट जमाया। मगर अर्जेंटीना के गोलकीपर मार्टिनेज ने बाईं ओर जबरदस्त डाइव लगाकर गेंद को गोल में जाने से रोक दिया और स्पेन के हाथ से एक और मौका निकल गया। टॉरेस ने 106वें मिनट में गोल दाग कर स्पेन को बढ़त दिया जो अंत तक बरकरार रही

 

 

 

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