जू. वर्ल्ड कप में रोहित शर्मा और रविन्द्र जडेजा के कप्तान रहे रविकान्त शुक्ला को बना रहे बॉलिंग कोच!

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-यूपीसीए की एजीएम आज, रिटायर हो रहे चार निदेशकों की पुन: नियुक्ति होगी

संजीव मिश्र

लखनऊ। यूपीसीए की बुधवार को होने वाली 21वीं वार्षिक बैठक (एजीएम) में रिटायर हो रहे चार निदेशकों अशोक कुमार चतुर्वेदी, अभिषेक सिंहानिया, रियासत अली और प्रदीप कुमार गुप्ता की पुन: नियुक्ति के साथ ही लोकपाल की भी नियुक्ति होगी, जबकि गवर्निंग काउंसिल के सदस्यों के चुनाव पर चुनाव अधिकारी की रिपोर्ट पर विचार होगा। लेकिन एजीएम से पहले होने वाले डिनर में स्पोर्ट्स लीक में प्रकाशित सपोर्ट स्टाफ की सूचियों पर आपस में खूब चर्चा हुई। कमला क्लब में हुए डिनर के दौरान सूची में शामिल कुछ लोगों के नामों पर आपत्ति भी उठी।

बता दें कि कमेटी की सिफारिश में कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनके पास कोई काम ही नहीं है या कुछ ऐसे हैं जिनकी काबिलियत कुछ है और उन्हें काम कुछ और सौंपा गया है। मसलन श्रीलंका में 2006 के जू. वर्ल्ड कप में रोहित शर्मा और रविन्द्र जडेजा के कप्तान रहे रविकान्त शुक्ला को अंडर-23 का बॉलिंग कोच बनाया जा रहा है, जबकि रविकान्त ने पूरे कॅरियर में विशुद्ध बल्लेबाज की भूमिका निभाई थी। रविकान्त के नेतृत्व वाली भारतीय टीम फाइनल तक पहुंची थी।

जहां तक गेंदबाजी का सवाल है तो उनके नाम पर सिर्फ 32 ओवरों की गेंदबाजी के बाद एक विकेट ही दर्ज है। ऐसे में यूपीसीए बतौर बॉलर कोच उनसे क्या अपेक्षा कर सकता है जिनको कभी एक अच्छा पार्ट टाइम गेंदबाज तक नहीं माना गया। रविकान्त ने अपने पूरे कॅरियर में सिर्फ 192 गेंदें फेंकी हैं। तो क्या उनको सिर्फ एडजस्ट किया जा रहा है? क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी को क्या यह भी नहीं मालूम था कि खेल के दौरान उनका मजबूत पक्ष क्या था? और यदि यह कमेटी इसी तरह की एडवाइज देती है तो इसमें काबिलियत कितनी है और इतनी ‘टैलेंटेड’ कमेटी की यूपी क्रिकेट को जरूरत भी क्या है?

सूत्र बताते हैं कि राहुल सप्रू रणजी टीम के कोच बनने के इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि इस टीम में बल्लेबाजी कोच उमंग शर्मा होंगे, ऐसे में उनके पास कोई काम ही नहीं रह जाता, क्योंकि टीम का हेड कोच ज्ञानेन्द्र पांडेय को बनाए जाने की योजना है। यूपी टीम के पूर्व कप्तान और सलामी बल्लेबाज रहे शशिकान्त खांडेकर को अंडर-23 में मोहम्मद आमिर खान का असिस्टेंट कोच बनाया जा रहा है। आमिर यूपी टीम के अच्छे विकेट कीपरों में रहे हैं लेकिन यहां सीनियर्स को सम्मान न दिए जाने की बात हो रही है। आमिर को किसी अन्य जूनियर टीम का हेड कोच भी बनाया जा सकता था। क्या खांडेकर अपना सम्मान गिराने वाली यह भूमिका स्वीकार करेंगे, सवाल अभी यह भी है?

हालांकि यूपीसीए की कार्यप्रराणी से वाकिफ लोगों को उम्मीद है कि बुधवार सुबह इन सूचियों में कुछ नाम बदले जा सकते हैं, क्योंकि यूपीसीए के पूर्व सचिव राजीव शुक्ला मंगलवार शाम को ही शहर पहुंच चुके थे और उनसे क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी (सीएसी) की ओर से स्वीकृति के लिए प्रस्तावित नामों पर चर्चा भी हुई होगी। गौरतलब है कि यूपीसीए की एडवाइजरी कमेटी ने 24 सितम्बर को हुई बैठक में लगभग सभी टीमों के सपोर्ट स्टाफ पर अपनी मुहर लगा दी है। यूपीसीए सचिव और कमेटी चेयरमैन के हस्ताक्षर की कॉपी भी स्पोर्ट्स लीक के पास है।

आश्चर्यजनक तो यह है कि 10 सितम्बर को प्रकाशित विज्ञापन में जिन पूर्व खिलाड़ियों ने आवेदन किया था उनके पास सीएसी का न तो फोन पहुंचा और न ही उनके नामों पर कोई चर्चा हुई, जबकि दो तीन मैच ही खेलने वाले अरविन्द कपूर तो यूपीसीए का चेहरा बन चुके हैं। कई पूर्व दिग्गजों को आवेदन करने के बावजूद इसलिए जगह नहीं मिल पाई, क्योंकि उनके घुसने से बड़े खिलाड़ियों का खेल बिगड़ सकता था। इसके उलट दिल्ली में चल रही एक अकादमी से जुड़े ध्रुव सिंह, मुमताज कादिर, इसरार अजीम और अर्जुन चौहान को सपोर्ट स्टाफ में महत्वपूर्ण पद दिए जा रहे हैं।

उदाहरण के लिए यहां सिर्फ चार नाम ही बताए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो साढ़े तीन लाख रुपए महीने के किराए पर दिल्ली में चल रही इस अकादमी के संचालक ने सीनियर और एज ग्रुप मेन्स व वुमेन्स टीमों में सपोर्ट स्टाफ के रूप में लगभग 90 से 95 फीसदी अपने चेले चपाटियों को एडजस्ट करवाया है। सलेक्शन कमेटियों में भी यही स्थिति है। मजेदार बात तो यह है कि इसने खुद की मालिश करने वाले को भी सपोर्ट स्टाफ में डलवा दिया है।

 

 

 

 

 

 

 

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